धारा में समाता प्राचीन काली मंदिर।
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विक्रमजोत। सरयू नदी अब तबाही की ओर रुख कर रही है। देखते ही देखते सैकड़ों वर्ष पुराना काली मंदिर सोमवार को नदी में समा गया। भीषण कटान से लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति गुस्सा भी है।
भरथापुर में सैकड़ों वर्ष पुराना काली मंदिर नदी की धारा से कटते की सूचना पर सैकड़ों लोग पहुंच गए। देखते ही देखते पहले नींव धंसी और फिर सुबह करीब 10 बजे पूरा काली मंदिर धारा से कटकर नदी में समा गया। मंदिर गिरते ही मौके पर निगरानी करने गए बाढ़ प्रखंड के जेई व कर्मचारी भाग खडे़ हुए। भय गांव वालों के गुस्से का था। मंदिर गिरने की जानकारी होते ही दोपहर तक भारी भीड़ जमा हो गई। रालोद नेता चंद्रमणि पाण्डेय ने लोगों के गुस्से को भुनाया और पूरी भीड़ लेकर कल्याणपुर से लेकर विक्रमजोत पुलिस चौकी तक पैदल जुलूस निकाले फिर ट्रॉलियों और ट्रकों पर लद कर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने बस्ती मुख्यालय पहुंच गए।
वहीं, अयोध्या स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के मुताबिक सरयू का जलस्तर 93.380 मीटर पर पहुंच गया है। शाम से नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नदी यूं ही बढ़ती रही तो तटबंधों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। बाढ़ का पानी पुलियों और अंडरपास से फोरलेन पार कर उत्तर दिशा में तेजी से फैलने लगा है। केशवपुर, रामनगर, पटखापुर समेत 27 गांव बाढ़ की जद में आ चुके हैं। फूलडीह गांव की पुलिया और निचले स्थानों के रास्ते सड़क के उस पार फोरलेन के किनारे पटखापुर के भट्ठे में पानी भर गया है।
बाढ़ खंड के अधिकारी नदारद
तेजी से बढ़ रही सरयू ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बाढ़ खंड के जिम्मेदार स्थलीय निरीक्षण से भी कतरा रहे हैं। अफसर बांध पर काम करवा रहे ठेकेदारों को फोन से ही तेजी लाने की हिदायत दे रहे हैं। जबकि ठेकेदारों ने बकाया भुगतान नहीं होने के कारण काम करने से इन्कार कर दिया है। पेटी डीलर के तौर पर राहत कार्य करवा रहे महेंद्र प्रताप सिंह, जगन्नाथ सिंह, हनुमान सिंह ने बताया कि पिछले चार सालों से बोल्डर और मजदूरी की रुकम बकाया है।