बस्ती। मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू और मलेरिया के संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिले की सीएचसी-पीएचसी पर डेंगू की रैपिड जांच तो हो रही है, लेकिन अधिकृत पुष्टि के लिए एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। इससे जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
बारिश के बाद गांव से लेकर शहर तक कई जगह जलभराव है। कई स्थानों पर पानी जमा रहने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ गया है। तेज बुखार के मरीज सीएचसी-पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक पहुंच रहे हैं। चिकित्सक जांच के बाद उनका उपचार कर रहे हैं। डेंगू के संदिग्ध मरीजों की सीएचसी-पीएचसी पर रैपिड जांच की जाती है। इसमें पॉजिटिव आने वाले मरीजों को एलाइजा जांच के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
जिला महिला अस्पताल में भी एलाइजा जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहां से भी जरूरत के अनुसार मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को पुष्टि के लिए मुख्यालय तक आना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए वार्ड आरक्षित किया गया है। हालांकि, फिलहाल वार्ड में मरीज न होने के कारण ताला लगा है। एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि एलाइजा जांच रोजाना चार-पांच मरीजों की हो रही है। पैथोलॉजी में वर्तमान में करीब 300 मरीजों के रक्त की जांच की जा रही है।
12 डेंगू और छह स्वाइन फ्लू के केस
जनपद में अब तक डेंगू के 12 और स्वाइन फ्लू के छह मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निजी अस्पतालों से जांच रिपोर्ट समय से नहीं मिलने के कारण बीमारी से जुड़े आंकड़ों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में दिक्कत आती है। विभाग ने निजी अस्पतालों की लैब में होने वाली डेंगू जांच की रिपोर्ट नियमित रूप से भेजने के निर्देश दिए हैं।
कोट
सीएचसी-पीएचसी पर डेंगू की रैपिड जांच की सुविधा है। एलाइजा जांच जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में हो रही है। जिन स्थानों पर डेंगू की पुष्टि होती है, वहां निरोधात्मक कार्रवाई की जाती है। निजी अस्पतालों को डेंगू जांच की रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।