ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में कार्यरत एक अवर अभियंता अधिकारियों की प्रताड़ना से इतने दुखी हो गए कि अवसाद का शिकार हो गए। उन्होंने माननीयों और अधिकारियों पर मिलीभगत करके सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप लगाया है। इसका खुलासा उन्होंने आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग, कमिश्नर, डीएम और सीडीओ को पत्र लिखकर किया है। साथ ही उन्होंने अवसाद से निकलने के लिए मूल विभाग में भेजने की अपील भी की है।
आरईडी में कार्यरत अवर अभियंता अबरार हुसैन को नौ अक्टूबर 2015 को क्षेत्र पंचायत और ग्राम निधि से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों का पर्यवेक्षण करने के लिए विकास खंड साऊंघाट में तैनात किया गया। अफसरों को लिखे पत्र में अवर अभियंता अबरार अहमद ने कहा कि माननीयों और अधिकारियों ने सरकारी धन का दुरूपयोग करने की नीयत से उनके स्थान पर एक ऐसे जेई को तैनात कर दिया जिसकी योग्यता ही नहीं है।
कहा कि इस नियम विरुद्घ व्यवस्था से व्यापक भ्रष्टाचार बढ़ने की संभावना हमेशा बनी रहती है। वर्षों से ग्राम निधि, राज्य वित्त आयोग और 14वां वित्त आयोग के धन से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों के पर्यवेक्षण का दायित्व आरईडी के अवर अभिंयता ही निभाते आएं हैं। इसके अतिरिक्त नियम विरुद्घ कार्यों का पर्यवेक्षण तकनीकी सहायकों से भी कराया जा रहा है, जबकि इनकी तैनाती मात्र मनरेगा कार्यों के संपादन के लिए ही किया गया, जिसका उन्हें मनरेगा के कंटीजेंसी से मानदेय के रूप में भुगतान किया जाता है।
जेई ने कहा है कि वह वर्तमान व्यवस्था से इतने व्यथित हैं कि वह अवसाद के शिकार हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा है कि ऐसे में उन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेज दे, ताकि वह अवसाद से उबर सके।
प्रभारी कमिश्नर एवं डीएम नरेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, बताया कि अगर किसी जेई या तकनीकी सहायक से नियम विरुद्घ पर्यवेक्षणीय कार्य लिया जा रहा है, तो कार्रवाई की जाएगी।