एक्सपॉयरी दवाओं के जिम्मेदार का अब तक नहीं लगा सुराग
- जिला अस्पताल ने तीन साल से नहीं किया एक्सपॉयर हुए दवाओं का इंडेंट
- एसआईसी ने जांच के बाद अस्पताल प्रशासन को दी क्लीन चिट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल के भंडार गृह के निकट लाखों रुपये के सरबूटामॉल व इन्हेलर सहित अन्य दवाएं एक्सपॉयर होने के कारण जिला अस्पताल के लिए कभी प्रयोग किए जाने वाले कमरे में रखी पाई गईं। जब मामला उठा तो एसआईसी ने जांच कराई। जांच में यह तथ्य उभर कर सामने आया है कि इन एक्सपायर दवाओं का तीन साल से इंडेंट ही अस्पताल ने नहीं किया है। अभिलेखीय जांच के बाद एसआईसी ने अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। यह अलग बात है कि अब भी स्वास्थ्य विभाग में यह चर्चा का विषय है कि आखिर यह सरकारी दवाएं कमरे में कैसे पहुंची और इसका कौन जिम्मेदार है, मगर इस सवाल का कोई जवाब देने वाला नहीं है।
बीते 16 अक्तूबर को ऑक्सीजन प्लांट के बगल स्थित बंद पड़े कमरे में भारी मात्रा में एक्सपॉयरी दवाएं, इन्हेलर मिला था। इसके कुछ दिन पहले अस्पताल की पानी की टंकी के पास भारी संख्या में एक्सपॉयरी दवाएं कूड़े में फेंक कर उसे जला दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन की ओर से इस पर रोक लगाने का अब तक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जा रहा है, जिससे लापरवाह कर्मियों की मनमनी और बढ़ती जा रही है। लाखों रुपये की दवाओं की होने वाली इस बर्बादी के संबंध में कोई पूछने वाला नहीं है। ऑक्सीजन प्लांट के बगल में बंद पड़े कमरे में इन्हेलर, साल्ब्यूटामॉल टेबलेट सहित अन्य दवाएं भारी संख्या में पड़ी हुई हैं। दवाओं के कुछ गत्ते तो ऐसे हैं, जो बिना खुले हुए एक्सपॉयर हो चुके हैं। जब दवाओं की पड़ताल की गई तो मालूम हुआ यह दवाएं मार्च 2021 में ही एक्सपॉयर हो चुकी हैं। अब इन्हें धीरे-धीरे ठिकाने लगाया जा रहा है।
एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा की जांच में तो साफ हो गया है कि तीन साल से कमरे में बंद दवाओं का इंडे ंट नहीं हुआ है। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जब यह जिला अस्पताल के स्टोर की दवा नहीं है तो फिर यह जिले के अन्य सरकारी दवाओं के भंडारण की तो नहीं हैं। एसआईसी डॉ. वर्मा ने कहा कि जांच में स्पष्ट हो गया है कि यह जिला अस्पताल की दवा नहीं है। चूंकि पहले अन्य स्टोर यहां नहीं थे, ऐसे में कुछ कमरे दवा स्टोर के रूप में मंडलीय भंडारण के रूप में होते थे। यह किसकी दवा है इसकी जांच में ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
क्या है इंडेंट
जिन दवाओं की कमी सरकारी चिकित्सालयों में होती है। उसकी मांग के लिए जो सूचना ड्रग कारपोरेशन को भेजी जाती है, उसे इंडेंट कहते हैं। इसे संबंधित भंडारण के स्टोर के अभिलेखों में भी दर्ज किया जाता है।