सड़कों के उच्च स्तरीय क्वालिटी जांच के लिए नमूने भेजने पड़ रहे लखनऊ
अस्थायी लैब से पीडब्ल्यूडी चला रहा काम, निर्माण की गुणवत्ता कटघरे में
बस्ती। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखने की जिले में मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। निर्माण सामग्री की जांच के लिए आधुनिक लैब न होने से कंकरीट एवं सड़कों की हाट मिक्स पैच सामग्री लखनऊ भेजनी पड़ रही है। इससे अधिकतर कार्यों की गुणवत्ता की परख निर्माण के दौरान नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि आधुनिक तकनीक से बनाई जाने वाली सड़कें व भवन समय से पहले क्षतिग्रस्त होकर खराब हो रहे हैं।
निर्माण कार्यों के लिए आधा दर्जन से ज्यादा एजेंसियां सक्रिय हैं। जिन्हें सरकारी भवन और सड़क बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। मगर, इसमें से किसी भी निर्माण एजेंसी के पास गुणवत्ता परखने के लिए आधुनिक प्रयोगशाला नहीं है। इस वजह से निर्माण कार्यों के दौरान प्रयुक्त होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की परख नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। कुछ मामलों में शिकायत के बाद गुणवत्ता की जांच जब तक बाहर से कराई जाती है तब तक संबंधित निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाता है। आधुनिक तर्ज पर महंगी लागत से बनने वाली सड़क और भवन में भी मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं हो पा रहा है।
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पीडब्ल्यूडी के पास अस्थायी लैब
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड और निर्माण खंड के पास गुणवत्ता की जांच के लिए अस्थायी लैब है। इसमें कंकरीट की गुणवत्ता की जांच की जाती है। इसके अलावा हाट मिक्स प्लांट की सड़कों के सामग्री की जांच की व्यवस्था यहां नहीं है। इसके लिए लखनऊ प्रयोगशाला का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, डूडा, नगर पालिका, नगर पंचायत, पैक्सफेड, सीएंडडीएस, जल निगम निर्माण इकाई आदि कार्यदायी संस्थाओं के पास गुणवत्ता जांच के लिए स्थानीय स्तर पर लैब नहीं है।
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केस- एक
नवंबर माह में सांसद निधि से सोनहा क्षेत्र के बनटिकरा गांव में दो करोड़ रुपये की लागत से बन रही मिनी स्टेडियम की छत ढलाई के समय गिर गई थी। इस हादसे में एक मजदूर की मलबे में दबने से मौत हो गई। यह कार्य समाज कल्याण निर्माण निगम के पास था। बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। तब जाकर निर्माण कार्य की जांच शुरू कराई गई और कार्यदायी एजेंसियों के अधिकारियों को यहां से स्थानांतरित किया गया।
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केस- दो
तीन साल पहले तपसी धाम में 16 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई हाट मिक्स प्लांट की सड़क समय से पहले ही टूटने लगी। जबकि इस सड़क की आयु पांच वर्ष मानी गई थी। विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद सड़क पर जगह-जगह पैच कार्य कराया गया। यदि निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवता जांच नियमित रूप से कराने की व्यवस्था होती तो शायद यह नौबत नहीं आती।
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केस- तीन
समाज कल्याण निर्माण निगम की ओर से जिले में तीन माध्यमिक स्तर के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के भवन बनाकर तैयार हैं। यह बेसिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर करना था। मगर, विभाग ने बाहरी अवलोकन करने मात्र से तमाम खामियां उजागर कर दीं। इसलिए यह भवन हैंडओवर नहीं हो सके हैं। अब निर्माण एजेंसी इन भवनों को फिर से दुरुस्त कराने में लगी है।
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केस- चार
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छबिलहा खोर में आठ साले पहले तीन खंडों में बनाए गए कांशीराम आवास के भवन भी हैंडओवर नहीं हो सके हैं। इस भवन की दीवारों के प्लास्टर तक उखड़ चुके हैं। कहीं-कहीं दरार पड़ गई है। भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। इस वजह से इस भवन का हस्तांतरण नहीं हुआ है। यदि सामग्री की गुणवत्ता की जांच के साथ निर्माण हुआ होता तो यह नौबत न आती।
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कोट
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड और निर्माण खंड के पास गुणवत्ता की जांच के लिए खुद के लैब हैं। इसमें आरसीसी निर्माण के लिए कंकरीट की जांच कराई जाती है। हाट मिक्स प्लांट की सामग्री की जांच एवं गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच लखनऊ प्रयोगशाला से कराई जाती है। जनपद में गुणवत्ता जांच के लिए काॅमन लैब की सुविधा नहीं है।
अवधेश प्रसाद, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, निर्माण खंड