मंगलवार को पुलिस, फायर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने दिन भर कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालित होने वाली बिल्डिंगों की जांच की है। लखनऊ की घटना के बाद से प्रशासन अलर्ट मोड में है तो, अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जिले में 120 कोचिंग संस्थान पंजीकृत हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या दो सौ के आसपास है।
जिले में कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी की भरमार हो गई है। लाइब्रेरी संचालित होने का कोई आंकड़ा सरकारी विभागों में नहीं है। गली-मोहल्लों से लेकर सघन आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र में मानक का उल्लंघन कर शहर में 25 से 30 लाइब्रेरी संचालित की जा रही है। जबकि इसी पैटर्न पर कोचिंग सेंटर भी चल रहे हैं।
विज्ञापन
माध्यमिक शिक्षा विभाग के रिकार्ड में जिले भर में 120 अधिक कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण हुआ है। मगर किसी के पास फायर एनओसी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि आग से बचाव के नियमों का पालन इन संस्थानों में नहीं हो रहा है। लखनऊ में कोचिंग सेंटर की की बिल्डिंग में आग लगने से हुई 15 विद्यार्थियों की मौत के बाद हड़कंप मच गया है।
मंगलवार को पुलिस, फायर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने दिन भर कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालित होने वाली बिल्डिंगों की जांच की है। लखनऊ की घटना के बाद से प्रशासन अलर्ट मोड में है तो, अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
जिले में 120 कोचिंग संस्थान पंजीकृत हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या दो सौ के आसपास है। इनमें से कई कोचिंग दूसरी और तीसरी मंजिलों पर संचालित हो रहे हैं। कुछ जगहों पर बेसमेंट में कोचिंग चल रही है। जबकि बेसमेंट में कोचिंग या लाइब्रेरी संचालित करने पर रोक लगा है।
अधिकांश भवनों में एक ही सीढ़ी और एक ही प्रवेश निकास मार्ग है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और शिक्षा विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर सभी कोचिंग सेंटरों एवं लाइब्रेरी की जांच कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकें और किसी संभावित हादसे को रोका जा सके।
संकरी गलियों और ऊपरी मंजिलों में चल रहे कोचिंग सेंटर
शहर के आवास विकास मुख्य मार्ग के किनारे बहुमंजिला इमारत में एक साथ तीन काेचिंग सेंटर संचालित होते हैं। जहां एक समय में 100 से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं। भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल पर चल रही इन कक्षाओं तक पहुंचने के लिए केवल एक संकरा रास्ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग जैसी कोई घटना हो जाए तो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल होगा। इसी तरह ब्लॉक रोड, मालवीय रोड, गांधीनगर क्षेत्र में भी कई कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी भी सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
कई स्थानों पर अग्निशमन यंत्र तक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि सैकड़ों विद्यार्थियों की आवाजाही एक ही गेट से होती है। कुछ लाइब्रेरी पहली मंजिल पर संचालित हैं, जहां पहुंचने के लिए बनी सीढ़ियां भी सुरक्षित नहीं मानी जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल ऐसे संस्थानों का सुरक्षा की जाचं कराई जानी चाहिए और नियमों का पालन न करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
गलियों में खुल गए होटल और अस्पताल
शहर के पचपेड़िया मार्ग पर कतार से अस्पताल खोले गए हैं। सघन आबादी के बीच इन अस्पतालों में क्षमता से अधिक मरीज और तीमारदार रोजाना पहुंच रहे हैं। इन अस्पतालों के पास आपातकालीन द्वार नहीं है। अगर यहां आग लगने की घटना हुई तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
इसी तरह रोडवेज, अस्पताल चौराहा, गांवगोड़िया, दक्षिण दरवाजा, रौता चौराहा, ब्लॉक रोड पर सघन आबादी के बीच तीन से चार मंजिला तक होटल बना लिए गए हैं। जिनके पास आपातकालीन द्वार नहीं है। कुछ होटलों के प्रवेश द्वार भी तीन से चार फीट चौड़ाई के हैं। शहरवासियों का कहना हैं कि यदि आगजनी जैसी कोई घटना हुई तो इस तरह के काॅमर्शियल बिल्डिंगों से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा।
शॉपिंग मॉल भी सुरक्षित नहीं
शहर में संचालित छोटे-बड़े शॉपिंग मॉल भी सुरक्षित नहीं है। अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा के लिहाज से रोडवेज के निकट स्थित एक शॉपिंग मॉल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने पर हाल ही में नोटिस दिया है। मगर इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है।
वहीं, शहर के कंपनीबाग, रोडवेज के निकट स्टेशन रोड पर, गांधीनगर बाजार क्षेत्र में अधिकांश शॉपिंग मॉल में आपातकालीन द्वार नहीं है। प्रवेश और निकासी के लिए महज एक ही रास्ता है। रोडवेज के निकट स्थित एक शॉपिंग मॉल में दिन में एक हजार के आसपास भीड़ रहती है। मगर यहां न तो पर्याप्त पार्किंग की सुविधा है और न ही अलग से निकासी द्वार है।
मंगलवार को शहर में संचालित छह कोचिंग सेंटरों की जांच की गई है। सभी संचालकों को सुरक्षा मानक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अब काॅमर्शियल बिल्डिंगों की जांच लगातार की जाएगी। अभी तक जिले के एक भी कोचिंग सेंटर एवं लाइब्रेरी संचालक द्वारा एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया गया है: यतींद्र नाथ मिश्र, जिला अग्निशमन अधिकारी
जिले के सभी कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी के लिए फायर एनओसी अनिवार्य की जाएगी। जिन संचालकों द्वारा सुरक्षा के मानक का पालन नहीं किया जाएगा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी: संजय सिंह, डीआईओएस।