हरैया क्षेत्र मे घाघरा के कटान देखते ग्रामीण।
घाघरा नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 12 सेमी. बढ़ा है। एलवी (लोलपुर-विक्रमजोत) बंधे का ठोकर नंबर एक और दो के पास कटान जारी है। कटान पर कंट्रोल नहीं होने से गांव वालों में नाराजगी बढ़ी है। दो दिन पूर्व भाकियू ने बंधे पर अधिकारियों का घेराव भी किया था। गांव वालों की माने तो मौके से बाढ़ खंड के कर्मचारी भी नदारद हो जा रहे हैं।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के मुताबिक सबसे बड़ा संकट पशुओं के चारे के लिए है। यहां घाघरा नदी के पास के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ और कटान कि समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पांच गांव कल्याणपुर, भरथापुर, बाघानाला, गौरियानैन और मुंडेरीपुर में आबादी क्षेत्र के बिलकुल सटकर भीषण कटान चल रही है। ठोकरों का मरम्मत कार्य बंद है। प्रशासन ने भी कोई पुख्ता सहायता नहीं पहुंचाई है। घाघरा का जलस्तर मंगलवार को खतरे के निशान से सात सेमी ऊपर 92:800 मीटर पर रहा। हाईवे और नदी के बीच बसे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
पिछले तीन दिनों से लोलपुर-विक्रम जोत बांध के ठोकर नंबर एक में जबरदस्त कटान हो रही है। पूरे बांध पर केवल इसी जगह बचाव राहत कार्य हो रहा है। बोल्डर, झावा, बांस, जाली सब कुछ घाघरा की धारा में समाहित हो रहा है। कर्मचारी भी मौके पर नहीं आ रहे हैं। प्रतिदिन निगरानी के नाम पर गौरियानैन बाढ़ चौकी बनी है जहां दो जेई सहित मेट की तैनाती है। गांव वालों का कहना है कि शिकायत सुनने वाला भी मौजूद नहीं रहता है। यही हाल रहा तो फिर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
दुबौलिया प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र के धरमूपुर एहतमाली व देवरागंग बरार गांव के पास घाघरा कटान कर रही है। चांदपुर व पारा गांव के पास नदी वीडी बांध के बगल धारा बहने होने से बांध संवेदनशील बना हुआ है। गायघाट प्रतिनिधि के मुताबिक पिपरपाती बंधे का स्पर नंबर पांच पर नदी का दबाव बना है। लगभग तीन से चार मीटर नोज बैठ गया है। कटान पर कंट्रोल नहीं होने से मटियरिया गांव पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन कटान रोकने में विफल है। इनके पास बोल्डर मुहैया नहीं हो पा रहा है। बाढ़ खंड के अवर अभियंता खलीक अहमद ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों से सुरक्षा कार्य चल रहा है।