गोरखपुर से अटैच हुआ निलंबित बाबू
बस्ती। भ्रष्टाचार को लेकर जिले का प्रोबेशन विभाग काफी चर्चित रहा है। आरोपों से घिरे यहां के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति गले की फांस बनती जा रही है। कनिष्ठ सहायक को बिना कैश बुक में इंट्री किए चार करोड़ 83 लाख से अधिक का धन भुगतान करने, पूर्व में बिना सामान की खरीदारी किए ही भुगतान करने पर सात फरवरी को निदेशालय स्तर से निलंबित कर दिया गया है। प्रकरण की जांच उप मुख्य प्रोबेशन अधिकारी गोरखपुर को सौंपी गई है। साथ ही कनिष्ठ सहायक गौरव कुमार सिंह को निलंबन के बाद गोरखपुर उप मुख्य प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।
उप मुख्य प्रोबेशन अधिकारी गोरखपुर दिलीप कुमार बस्ती प्रोबेशन कार्यालय में डीपीओ के पद पर तैनात रह चुके हैं और गौरव इनका अधीनस्थ, दोनों लोगों की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा रुधौली विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने शासन में की थी, लेकिन उस समय इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। विधायक ने यहां तक कहा था कि इनके द्वारा सरकार की छवि खराब की जा रही है। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन के संज्ञान में जैसे ही मामला आया, उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और हर पहलुओं की जांच किए जाने की बात कही। जिसके क्रम में संबंधित कनिष्ठ सहायक को निदेशालय स्तर से निलंबित कर दिया गया।
जांच की जानकारी नहीं है
विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उप मुख्य प्रोबेशन अधिकारी गोरखपुर दिलीप कुमार कहते हैं कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। कनिष्ठ सहायक की जांच के संबंध में पूछे जाने पर भी उन्होंने यही बात कही। कहा कि अभी उन्हें कोई पत्र नहीं प्राप्त हुआ है।