बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज की आवासीय व्यवस्था चरमरा गई है। वर्ष 1995-96 में यहां चिकित्सालय के साथ आवासीय भवनों का निर्माण हुआ था। तब यहां मेडिकल कालेज का अस्तित्व नहीं था, अलबत्ता ओपेक कैली के नाम से इस अस्पताल का निर्माण एसजीपीजीआई की तर्ज पर हुआ था। अस्पताल बनने के बाद इस लेवल की सुविधाएं यहां से छिन गई। दो दशक बाद इस अस्पताल को फिर से संजीवनी तब मिली जब इसे मेडिकल कालेज से संबद्ध किया गया। बावजूद इसके, व्यवस्था जस की तस रह गई। यहां आवासीय भवनों तक पहुंचने के लिए समतल एवं अच्छा रास्ता तक नहीं है। जलनिकासी की व्यवस्था भी ठप है। पीने योग्य पानी की सुविधा कहीं नहीं है। यहां रहने वाले लोगों को बाहर से पानी लाकर पीना पड़ता है। चौतरफा कूड़े-करकट एवं गंदगी का ढेर है। सुबह-शाम लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल है। भवन के आसपास झाड़ियों की घनेरी है। इन दुश्वारियों के बीच एक साथ रह रही दो सौ परिवार का पुरसाहाल नहीं है।
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बदइंतजामी ने खत्म कर दी भवनों की कैटेगरी
ओपेक चिकित्साल कैली परिसर में विभिन्न कैटेगरी के आवासीय भवन बदइंतजामी के चलते अब एक जैसे हो गए हैं। अधिकारियों के आवासों की स्थिति कुछ हद तक ठीक है। लेकिन टाइप-टू से टाइप फोर तक के सभी आवासीय भवनों के प्लास्टर जगह-जगह उखड़ने लगे हैं। दीवारों में पेड़-पौधे उग आए हैं। भवनों के ऊपर बनाई गई अधिकांश टंकियां टूट गई है। घरों में सप्लाई के पानी का ही सहारा है। सीढ़ियों की रेलिंग पर जगह-जगह सीमेंट की परत उखड़ी हुई है। बरामदों की फर्श भी टूट गई है। रंगरोगन न होने से सभी भवन बदरंग हो गए हैं। यहां रहने वाले कर्मचारी खुद के खर्च से किसी तरह कमरों के भीतर की स्थिति ठीक बनाए हुए हैं।
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शौचालय की टंकियां टूटी, बाहर पसरा गंदा पानी
टाइप टू, टाइप थ्री और टाइप फोर आवासी भवनों के लिए बनाई शौचालय की टंकियां पानी का बहाव न होने से कम समय में ही ओवरफ्लो हो गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से सफाई भी नहीं कराई गई। जिससे टंकियां टूट गई है। अब शौचालय का गंदा पानी रिसकर भवनों के सामने इधर-उधर पसरा हुआ है। यहां हर समय दुर्गंध रहती है। हालत यह है कि यहां रहने वाले लोग अपने घरों का दरवाजा बंद रखते हैं।
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उखड़ गईं सड़कों की गिट्टियां, राह चलना दूभर
चिकित्सालय कैंपस में ब्लाकवार सड़कों का निर्माण हुआ था। ताकि सभी टाइप के आवासीय भवन तक आसानी से पहुंचा जा सके। मगर इन सड़कों का रखरखाव नहीं हो पाया। अब यहां पैच कार्य उखड़ गए हैं। सड़क में जगह-जगह गड्ढे बन आए हैं। सड़कों के किनारे कूड़े-करकट का ढेर लगा है। जलभराव के चलते सड़क के दोनों तरफ घनी झाड़ियां उग आई है। राह चलने की तो बात छोड़िए, सुबह-शाम इन सड़कों पर टहलने लायक भी नहीं रह गया है।
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पेयजल की सुविधा नहीं
कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासीय भवनों में पेयजल की सुविधा नहीं है। पीने योग्य पानी लोगों को बाहर से लाना पड़ रहा है। यहां सुबह शाम आने वाला सप्लाई का पानी स्टोर किया जा रहा है। यहां नलों से निकलने वाला पानी दूषित बताया जा रहा है। जिसका उपयोग शौचालय, बर्तन और कपड़ा धुलने एवं नहाने में किया जाता है। इस पानी के स्टोरेज की भी व्यवस्था नहीं है। पांचवें तल पर बनाई गई अधिकतर टंकियां टूट चुकी हैं।
टाइप वन और टाइप फाइव में दिखा रंगरोगन
चिकित्सकों के लिए बनाए गए टाइप वन आवासीय भवन तथा अधिकारियों के लिए बनाए गए टाइप फाइव आवासीय भवन की स्थिति कुछ हद तक ठीक है। जिम्मेदारों के रहने की वजह से यहां समय-समय पर मरम्मत एवं रंगरोगन का कार्य होता रहता है। लेकिन इन ब्लाकों में भी सड़कों की दशा खराब है।
यहां बदइंतजामी के बीच सरकारी आवास में रहना मजबूरी बन गई है। शहर से काफी दूर न होते तो दुश्वारियां झेलने से अच्छा कहीं किराए का मकान लेकर रह लेते। यहां नाली, पानी की सबसे बड़ी समस्या है। -पूर्णिमा पांडेय।
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आवासीय भवन के ऊपर बनाई गई पानी की टंकी टूट गई है। जिससे पानी का नियमित सप्लाई नहीं है। पीने योग्य पानी बाहर से लाते हैं और कपड़ा धुलने एवं बाथरूम के उपयोग के लिए सुबह-शाम सप्लाई का पानी एकत्र करते है। -प्रमोद आर्य।
मेडिकल काॅलेज स्तर के चिकित्सालय की आवासीय कालोनी की इतनी दुर्दशा कहीं नहीं होगी। यहां पहुंचने के लिए एक अच्छी सड़क भी नहीं है। घरों से निकलने वाले कूड़े के प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है। खुले में इधर-उधर गंदगी का ढेर लगा है। -गीता।
बारिश आने दीजिए तब यहां का दृश्य और खराब हो जाता है। गंदा पानी सड़क पर पसरा रहता है। हम लोग उसी पानी में घुसकर बाहर निकलते हैं। साफ-सफाई तो यहां कभी होती ही नहीं है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने कालोनी में चौतरफा बदबू रहता है। -विपिन कुमार।
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आवासीय कालोनी की समस्या से सभी जिम्मेदार अवगत है। हमने अपने स्तर से उच्चाधिकारियों को यहां की दुश्वारियों से अवगत करा दिया है। कुछ कार्यों को स्वीकृति भी मिल गई है। जल्द सड़क मरम्मत एवं ड्रेनेज निर्माण का कार्य शुरू होने वाला है। -डाॅ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली।