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खर्च हो गए 4.65 करोड़, न बजी शहनाई, न हुआ अंतिम संस्कार

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अमहट घाट पर बने अंत्ये​​ष्ट स्थल में उगीं झाड़ियां। - फोटो : BASTI
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खर्च हो गए 4.65 करोड़, न बजी शहनाई, न हुआ अंतिम संस्कार
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वर्ष 2015-16 में अमहट घाट पर कराया गया था अंत्येष्टि स्थल का निर्माण
दो वर्ष से स्वरूप बदलने की राह देख रहा स्थल
बस्ती। कुआनो नदी के अमहट घाट पर नगर पालिका की ओर से 4.65 करोड़ रुपये से अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया है, मगर सात साल बाद भी इसका उपयोग नहीं हो सका। तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने करीब दो वर्ष पहले इस स्थल को बरात घर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे, मगर वित्तीय व तकनीकी कारणों से इसका स्वरूप नहीं बदला जा सका। नतीजतन अब तक न इसमें अंतिम संस्कार हो सका और न शहनाई बज सकी।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-13 में नगर पालिका ने अमहट घाट पर अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के 4.65 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस पर शासन ने सहमति दे दी। इसके बाद निर्माण शुरू हो गया। वर्ष 2015-16 में निर्माण पूरा हो गया, मगर आयुक्त कार्यालय के पास स्थित अंत्येष्टि स्थल के संचालन की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। इसी बीच नगर पालिका का चुनाव आ गया।
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नए अध्यक्ष ने शुरू में इस पर ध्यान नहीं दिया। बाद में इस पर मंथन शुरू किया तो तमाम तकनीकी पहलुओं के चलते रस्साकसी होने लगी। शासन ने इसकी जांच भी कराई और मामला सदन तक गूंजा। सब कुछ ठीक होने के बाद तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने अमहट घाट पर अंत्येष्टि स्थल को खारिज करते हुए नगर पालिका को इसका स्वरूप बदलकर बरात घर बनाने के निर्देश दिए। दो वर्ष से वित्तीय व अन्य कारणों से इसका स्वरूप बदला नहीं जा सका है।
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कोट
कुआनो नदी के अमहट घाट पर स्थापित अंत्येष्टि स्थल के स्वरूप को बदलने पर मंथन चल रहा है। इसके लिए वित्तीय व्यवस्था की जा रही है। तकनीकी पक्ष को व्यवस्थित कर प्रशासन के निर्देश के अनुसार इसका संचालन बरात घर के रूप में किया जाएगा।
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रूपम मिश्रा, अध्यक्ष, नगर पालिका
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अंत्येष्टि स्थल के तकनीकी पक्षों की जांच कर उसे बरात घर के रूप में विकसित करने की योजना को अमली जामा पहनाया जाएगा। चूंकि यह अंत्येष्टि स्थल नगर पालिका का है। ऐसे में पालिका ही वहां इसका स्वरूप बदल सकेगी।
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ
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