बस्ती। राज्यपाल रामनाईक आदर्श शिक्षक की भूमिका में दिखे। उन्होंने छात्रों को अपने व्यक्तित्व विकास करने के लिए चार मंत्र बताया। वहीं कार्यक्रम में अव्यवस्था और टाइम मैनेजमेंट में विफल होने पर प्रिंसिपल को भी नसीहत दी।
राज्यपाल रामनाईक गुरुवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबाग में नवीन भवन माधव प्रकल्प का लोकार्पण और सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।
राज्यपाल ने बीच में टोकाटाकी कर समय के हिसाब से कार्यक्रम न समेटने पर हल्की नाराजगी जाहिर की। बाद में माहौल को हल्का करते हुए कहा कि कुछ तो अव्यवस्था की गड़बड़ी है और कुछ मेरे जाने की हड़बड़ी।
इसलिए कार्यक्रम के उत्साह पर पानी डालना पड़ रहा है। प्रिंसिपल अरविंद सिंह चौहान को मिनट-टू-मिनट के हिसाब से मैनेज करने की नसीहत दी। व्यक्तित्व विकास पर जोर देने के लिए चार मंत्र दिया।
स्माइल, स्माइल एंड स्माइल ः राज्यपाल ने कहा मुस्कराने वाला व्यक्ति अपने आप में सबसे प्रिय हो जाता है, लेकिन कब मुस्कराना है, इसका भी ध्यान होना चाहिए। अगर घर में माता-पिता के बीच तकरार हो रही हो तो बच्चे मुस्कराने से बचें, क्योंकि ऐसा करने अहितकर हो सकता है। मुस्कराने से मन की सुंदरता अपने आप बढ़ जाती है।
दूसरे के अच्छे काम की तारीफ करें ः रामनाईक ने कहा कि हमेशा दूसरों के अच्छे काम की तारीफ करनी चाहिए। छोटा भी बड़ों के अच्छे काम की तारीफ कर सकता है। जैसे कि घर में अगर आपकी मां ने अच्छा व्यंजन बनाया है तो इसकी भी तारीफ की जा सकती है, क्योंकि जो प्रिय होता है, वहीं सबसे आगे जाता है।
किसी की अवमानना मत करें ः राज्यपाल ने कहा कि अपनी सफलता पर इतराइ, मगर दूसरों की अवमानना करके नहीं। अगर आपका कोई साथी थोड़ा कम अंक पाता है और आप अधिक तो अपनी सफलता पर गर्व कीजिए, लेकिन दूसरे की मानहानि मत करिए। कहा कि सफलता के साथ अहंकार मत आने दें।
अहंकार एक स्पीड ब्रेकर है, जिससे सावधान रहें। जो कर रहे हैं, उसको और अच्छे से करें ः राज्यपाल रामनाईक ने आखिरी मंत्र के रूप में बताया कि हर व्यक्ति किसी भी काम को बेहतर तरीके से करता है, लेकिन जो आप कर रहे हैं, उसको और बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है, इसका हमेशा चिंतन कर अमल करने से व्यक्तित्व में निखार आता है।