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मुरादपुर में सन्नाटा, पुरुषों ने गांव छोड़ा

Fri, 16 Oct 2015 12:35 AM IST
बस्ती, अमर उजाला
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मुरादपुर बूथ पर 13 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान हुए बवाल के बाद अब गांव के लोग तीसरे दिन बृहस्पतिवार भी पुलिस के खौफ से सहमे हुए हैं। गांव में सन्नाटा है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। गांव के पुरुष और युवा गांव छोड़ चुके हैं।
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वहीं महिलाएं पुरुषों के फंसाने से आशंकित हैं। ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मुरादपुर में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होने से कुछ समय कुछ लोग जबरन वोट डालने पहुंचे। गांव के ही गुलशन ने रोका तो उसकी पिटाई कर दी गई। इससे मामला बढ़ गया। बूथ पर पहुंचे लोग दोबारा मतदान की मांग करने लगे।

 गांव के लोगों के मुताबिक बाद में पुलिस टीम ने पहुंचते ही लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इससे कई लोग घायल हो गए। गांव के लोगों के अनुसार निर्दोष गांव वालों की पिटाई की गई।
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हालांकि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी चोटिल हुए। बाद में पुलिस टीम ने लोगों के घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को अशब्द कहे। यहां तक की पिटाई से भी गुरेज नहीं किया गया। इसी के चलते गांव में तीसरे दिन भी खौफ का माहौल है।  
वहीं इस मामले में 23 नामजद समेत दौ सौ से ढाई सौ अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। इससे लोग पुलिस के द्वारा अपने बचाव में किसी को भी फर्जी मुकदमे में फंसाए जाने की आशंका से गांव के लोग भयभीत हैं। इससे बचने के लिए घर के पुरुष और किशोर गांव से पलायन कर गए हैं।

 हर आने जाने वालों को लोग डरी नजरों से देख रहें हैं।किसी निर्दोष को परेशान नहीं कर रही पुलिस ःएसपी कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पुलिस किसी निर्दोष को बेवजह कतई परेशान नहीं कर रही है। हां बवाल करने  वाले आरोपियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

गांव में खौफ के सवाल पर कहा कि कहीं कोई दहशत में नहीं है। पुलिस गांव वालों की मदद के लिए है। वहीं एसओ कलवारी अखिलेश सिंह का कहना है कि मुरादपुर मामले में वांछित अभियुक्तों की तलाश की जा रही है। पूर्व में गिरफ्तार नौ लोगों के अलावा अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं की  गयी है।

गांव की जगपाती देवी का कहना है कि मेरे बेटे अनिल, सुनील और इन्द्रजीत बाहर रहते हैं यदि बूथ पर धांधली नहीं हुई तो इनका मत कैसे किसी ने डाल दिया। महिलाएं भी डरीं हैं कि कहीं पुलिस उनको भी न  मुलजिम बना दे।

 वहीं गांव की शारदा देवी का कहना है कि मेरा बेटा धर्मेन्द्र बीएलओ है मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर विवाद हुआ होता तो दिन भर शांतिपूर्ण मतदान कैसे हुआ होता। यही नहीं घर में घुसकर पुलिस ने मेरे बीएलओ बेटे के साथ साथ 17 साल के अखिलेश और 16 साल के अभिषेक पर लाठियां भांजी गईं और गिरफ्तार कर लिया गया।

उर्मिला कहती हैं कि जनता शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात बताना चाहती थी पर गुनहगारों को मदद पहुंचाने के लिए और पुनर्मतदान को टालने के लिए पुलिस ने दमनात्मक कार्रवाई कर दी।

घरों में खड़ी मोटरसाइकिलों और अन्य उपयोगी सामानों को तोड़ फोड़ डाला। लाली देवी का कहना है कि मेरा बेटा रामचन्दर बीडीसी का प्रत्याशी था और मतदानकर्मियों के साथ बैठा था बेवजह उसकी पिटाई कर गिरफ्तार कर लिया गया।
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