रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैग के साथ आरपीएफ को मिला बच्चा।
बस्ती रेलवे स्टेशन पर रविवार की रात में एक बैग में सुलाए गए लगभग एक वर्षीय लावारिस शिशु को सोमवार को न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा की देख रेख में उसके पिता को सौंप दिया। अपने बच्चे को दो माह बाद पाने की खुशी में पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। दो माह पूर्व बच्चे को लेकर किसी और के साथ चली महिला गई थी।
उल्लेखनीय है कि जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने दो माह पहले अपनी पत्नी और लगभग एक वर्षीय बेटे के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी थी। वह खुद भी पत्नी और बेटे को ढूंढने में जुटे थे। फोन के जरिए सोमवार की भोर में बच्चे के बारे में उन्हें जानकारी मिली।
किसी ने आरपीएफ को सूचना दी कि रेलवे स्टेशन पर एक लावारिस बैग फेंका हुआ है। जानकारी के बाद जब आरपीएफ टीम ने बैग को चेक किया तो उसमें एक शिशु सोता पाया गया। बैग की दूसरी जेब में दूध और दूध पिलाने वाली बोतल मिली और तीसरी जेब में बच्चे का पता उसके पिता का नाम और तीन फोन नंबर लिखा एक कागज मिला।
आरपीएफ के जिम्मेदारों ने पहले नंबर पर फोन किया तो शिशु के पिता से बात हो गई। इसके बाद आरपीएफ ने चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता चंदन शर्मा को बुला कर बच्चे को सौंप दिया। चाइल्ड लाइन ने सोमवार को बच्चे को तथा उसके पिता को न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया।
पिता ने बताया कि उसकी पत्नी अपने छोटे बेटे को लेकर दो माह पूर्व किसी और के साथ चली गई है, जबकि उसके घर पर तीन साल और 5 साल के और भी दो बच्चे हैं। न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, मंजू त्रिपाठी ने कागजी कार्रवाई के बाद शिशु को पिता को सौंपने का निर्णय लिया। पिता ने कहा कि वह पत्नी के बिना ही अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहता है।