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Basti News: मॉडिफाइड बाइक भर रहे फर्राटा...20 लाख का हुआ धांय-धांय का धंधा

Fri, 21 Nov 2025 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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रुधौली में पकड़ी गई मॉडिफाइड बाइक - पुलिस
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बस्ती। जिले में बाइक मॉडिफिकेशन का काला कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। स्टंटबाजों और रेसिंग के दीवानों ने शहर की सड़कों को शोर, खतरे और अवैध मशीनों का अखाड़ा बना दिया है। दिल्ली के करोल बाग और कश्मीरी गेट से सीधे आने वाले पार्ट्स हर नियम को ठेंगा दिखा रहे हैं।
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शहर में हर महीने 15 से 20 लाख रुपये तक का यह धंधा बेखौफ चल रहा है। इसकी न कोई जांच होती है और न लाइसेंस बनता है। नतीजा रोज सड़क पर दहशत, हादसे और मौत का डर। बृहस्पतिवार को रुधौली में पुलिस ने एक ऐसी ही बाइक पर स्टंट करते हुए दो युवकों को पकड़ा था। मगर शहर अक्सर फर्राटा भरने वालों को टोकने वाला कोई नहीं दिखता। ऑटो पार्ट्स व्यवसायी बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में बाइक मॉडिफिकेशन का धंधा अचानक फूला-फला है। रेसर बाइक के शौकीन युवाओं की मांग ने इस कारोबार को एक समानांतर बाजार में बदल दिया है।
जायजा लेने पर पता चला कि शहर के कटेश्वरपार्क, कंपनीबाग, रोडवेज और मालवीय रोड पर कई ऐसी दुकानें हैं जहां खुलेआम बाइक मॉडिफिकेशन के अवैध पार्ट्स बेचे जा रहे हैं। दुकानें बाकायदा कैटलॉग दिखाकर ऑर्डर लेती हैं और एक हफ्ते में बाइक का पूरा रूप-रंग बदल देती हैं।
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कट्टा फायर वाला साइलेंसर की सबसे ज्यादा बिक्री
दिल्ली के करोल बाग से आने वाले साइलेंसर, जिनकी कीमत छह हजार से लेकर 18 हजार रुपये तक है, जो सबसे अधिक बिक रहे हैं। 18 हजार वाला साइलेंसर सबसे हॉट-सेलिंग प्रोडक्ट है, क्योंकि इससे निकलने वाली कट्टा फायर जैसी आवाज स्टंटबाजों को खास पसंद है। शहर की गलियों में देर रात को सुनाई देती ‘धांय-धांय’ की आवाजें इसी अवैध साइलेंसर का नतीजा हैं। इतना ही नहीं, 10-15 हजार रुपये लगाकर चौड़े टायर, अलॉय व्हील, शॉर्ट हैंडल, डबल साइलेंसर, हाई पावर हेडलाइट और स्पेशल स्टिकर पैक लगवा दिए जाते हैं। मॉडिफिकेशन कराने के बाद बाइक का वजन और संतुलन बदल जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पिछले हफ्ते स्टेशन रोड पर इसी तरह मॉडिफाई बाइक पर स्टंट करते तीन युवक हादसे का शिकार हुए थे।

बाहर से कराते हैं मॉडिफाई
रोडवेज के एक अन्य दुकानदार ने बताया कि बाइक मॉडिफाई करने का काम यहां नहीं किया जाता है। इसके लिए करीब एक सप्ताह के लिए बाइक ली जाती है। 35 से 40 हजार के खर्च में बाइक में शार्ट हैंडिल, डबल साइलेंसर, एलाॅय व्हील, हेडलाइट, हॉर्न, स्टीकर और स्टाइलिश लेग गार्ड और सीट कवर लगाई जाती है। इसके बाद बाइक की आवाज और लुक दोनों ही बदल जाते हैं। स्पीड बढ़ाने के लिए बाइक में अलग से एक्स्ट्रा पाॅवर सिलेंडर लगाया जाता है।

सुनाई दे शोर तभी लड़के खुश होते हैं
कटेश्वर पार्क के एक मकैनिक ने बताया, आजकल ज्यादातर लड़के स्टंट के लिए बाइक बनवाते हैं। साइलेंसर जितना तेज आवाज करेगा, उतना ही उन्हें रोमांच मिलता है। दिल्ली से जो माल आता है, उसमें कई पार्ट्स पूरी तरह गैरकानूनी हैं, लेकिन मांग सबसे ज्यादा उन्हीं की है। एक हफ्ते में 8-10 बाइक मॉडिफाई कर देते हैं। 35-40 हजार खर्च कर लोग फिल्मी स्टाइल वाली बाइक चाहते हैं। आवाज और लुक देखकर ही पहचान आ जाती है कि बाइक मॉडिफाई है। मकैनिक ने यह भी स्वीकार किया कि साधारण बाइक में जब एक्स्ट्रा पावर सिलेंडर या चौड़ा टायर लगाते हैं तो नियंत्रण बिगड़ जाता है।
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साउंड नहीं तो मजा क्या
शहर में घूम रहे 18-22 साल के युवाओं का एक ही जवाब- हम मोडीफाई बाइक इसलिए लेते हैं ताकि इसमें पावर और आवाज दोनों होती है। तेज आवाज का मजा अलग है। भीड़ में लोग देखते हैं तो अच्छा लगता है। पुलिस एक-दो बार पकड़ ले तो भी ठीक। 1000-1500 का चालान भर देंगे। बाइक के बिना स्टंट नहीं होता। एक युवक ने बेझिझक कहा, तेज आवाज में गाना सुनकर बाइक चलाने का अलग लेवल का मजा है। हेलमेट में ब्लूटूथ है, अंदर ही साउंड सिस्टम है। गाना बजाओ और उड़ा दो बाइक।
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मॉडिफिकेशन मार्केट की असली तस्वीर
दुकानदाराें का कहना है कि शहर में हर महीने 10 से 15 लाख रुपये तक के पार्ट्स बिकते हैं। पल्सर, बुलेट, होंडा और टीवीएस सबसे ज्यादा मॉडिफाई होने वाली बाइकें हैं। ग्राहक तैयार बैठे हैं, बस नई लुक और तेज आवाज की मांग लगातार बढ़ रही है। माल दिल्ली के करोल बाग और कश्मीरी गेट से थोक में आता है, फिर बस्ती में 30-40 प्रतिशत मार्जिन पर बेचा जाता है। कई दुकानों पर पार्ट्स का कोई रजिस्टर नहीं, कोई बिल नहीं, सब नकद कारोबार हो रहा है।
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कोट
कंपनी से निकली बाइक या फोर व्हीलर में कोई दूसरा पार्ट्स नहीं लगवा सकते हैं। इसको रोकने के लिए अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। इधर फिर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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-सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, सीओ यातायात
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