मौसम की मार से बच्चे दिक्कत में फंस गए हैं। संक्रामक रोगों के इस मौसम में हाईफीवर भी बच्चों की किलकारियां छीन रहा है। जिला चिकित्सालय का चिल्ड्रेन वार्ड फुल हो चुका है। 49 बेडों पर 50 बच्चे भर्ती हैं।
मंगलवार की दोपहर तक छह डायरिया तो चार हाईफीवर के बच्चे भर्ती कराए गए। बच्चों के लिए बनाए गए जेई-एईएस वार्ड में एक पीड़ित था, मगर हाईफीवर के मरीजों को भी इसी वार्ड में रखा गया है। डायरिया से दुबौलिया के उभाई गांव निवासी पांच वर्ष का हर्षित, छह बेतौहा गांव निवासी छह माह का शीतल, कप्तानगंज 19 माह का सरफराज, नगर के कुड़वा गांव निवासी छह वर्ष की अंशिका, 10 माह की खुशी सहित 27 मरीज वार्ड में भर्ती हैं। इनमें सभी डायरिया से पीड़ित हैं। इसी प्रकार ऊपरी वार्ड में तेज बुखार से पीड़ित छह साल की रजनी, दस माह का संदीप, दो माह के रौनक, तीन साल का इस्लाम भर्ती है। तीमारदारों ने बताया कि अधिकतर दवाएं चिकित्सालय से ही मिली हैं। जो भी मरीज भर्ती हुए हैं। उन्हें शत-प्रतिशत दवाएं हड़ताल के चलते जिला चिकित्सालय से ही मुहैया कराई गई हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके श्रीवास्तव कहते हैं कि बदलते मौसम का असर बच्चों पर सर्वाधिक होता है। इसका कारण की उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना है। इस मौसम में वायरस की क्षमता बढ़ जाती है क्योंकि बारिश के चलते वातावरण में आर्द्रता होती है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे मौसम में बच्चों को बासी भोजन से दूर रखें। पानी उबाल कर ठंडा होने के बाद पिलाएं। यदि उल्टी दस्त शुरू हो जाए तो उन्हें ओआरएस घोल दें अथवा चुटकी भर नमक और चीनी का घोल भी ओआरएस का काम करता है। पानी की कमी न होने पाए।