बस्ती। जिले में चार राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चल रहे हैं। इनमें 15 सौ से अधिक सीटें हैं। संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश होता है। ऐसे में क्रीमी ट्रेड में उच्च मेरिट वाले विद्यार्थियों को प्रवेश मिल जाता है, लेकिन कम मेरिट वाले विद्यार्थी मनचाहा ट्रेड पाने के लिए परेशान रहते हैं, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान निजी आईटीआई से हो सकता है।
व्यवसायिक शिक्षा आधुनिक परिदृश्य में युवाओं को जल्दी रोजगार पाने में काफी मददगार साबित हुई है। 12वीं के बाद तमाम युवा व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई करना पसंद करते हैं। ऐसे में उनका रुख आईटीआई की तरफ जाता है। राजकीय आईटीआई में फीस कम होने और सुविधाएं अधिक होने के कारण प्रवेश के लिए मारामारी मच जाती है। तमाम युवा मनचाहा ट्रेड न मिलने से पढ़ाई एक साल के लिए छोड़ देते हैं।
जिले के प्रसिद्ध शिक्षक डॉ. शिवेंद्र मोहन पांडेय बताते हैं कि एक बार पढ़ाई से ब्रेक ले लिया जाए तो लौटने में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि मनचाहे विद्यालय, संस्थान या पाठ्यक्रम में प्रवेश न मिले तो समय का सदुपयोग कर कोई अन्य कोर्स कर लें।
उल्लेखनीय है कि जिले में 26 निजी आईटीआई संस्थान चल रहे हैं। इनमें वायरमैन, वेल्डर, स्विंग टेक्नालाॅजी, कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक, मेकेनिक, मोटर मेकेनिक व्हीकल, ड्राफ्ट्समैन सिविल व मेकेनिकल, मेकेनिक रेडियो एंड टीवी, टर्नर, मशीनिष्ठ, स्टेनोग्राफी, फैशन टेक्नालॉजी, बेसिक काॅस्मेटोलॉजी आदि ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। तमाम विद्यार्थियों की मेरिट कम होने से उन्हें मनचाहा ट्रेड नहीं मिल पाता है। ऐसे में निजी संस्थान उनके लिए विकल्प हो सकते हैं, जहां उन्हें मनचाहा ट्रेड मिल जाए। निजी संस्थान शासन की गाइड लाइंस के अनुसार ही फीस ले सकते हैं। मनमानी करने पर कार्रवाई की जाती है।
-पुरुषोत्तम मिश्र, संयुक्त निदेशक आईटीआई।