बस्ती। गर्म हवा के थपेड़े और 42 डिग्री के पार पहुंच चुके तापमान ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। तपिश ने लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर दिया है। दिन चढ़ने के साथ ही सड़कों पर सन्नाटा साफ नजर आ रहा है। घरों के भीतर भी लोगों को राहत नहीं है। बिजली कटौती और लगातार ट्रिपिंग परेशानी बढ़ा रही है। सोमवार से नौतपा शुरू हो रहा है, अगले नौ दिन तक भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं।
रविवार को दिन चढ़ने के साथ ही पारा चढ़ने लगा और 10 बजने तक धूप काफी तल्ख हो चुकी थी। सुबह के 11 बजते-बजते सड़कें एकदम सूनी नजर आने लगीं। ठसाठस भीड़ से भरे रहने वाले गांधीनगर, कंपनीबाग, न्याय मार्ग, पांडेय बाजार, मंगल बाजार जैसे प्रमुख स्थानों पर भी सन्नाटा छाया रहा। शहरी क्षेत्रों में हर दस मिनट पर बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। एसी, कूलर और पंखों का उपयोग तक संभव नहीं हो पा रहा। तपिश का असर रात में भी कम नहीं हो रहा है। भीषण गर्मी में बेतहाशा बिजली कटौती से लोगों की रात की नींद और दिन का चैन दोनों गायब हो गए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी और उमस का असर लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है।
ट्रांसफार्मर बदलने में लग जा रहे एक से दो दिन : शहर के गांधीनगर क्षेत्र के तुरकहिया, पक्के, रामेश्वरपुरी, आवास विकास समेत कई मोहल्लों में बिजली की कटौती की समस्या लाइलाज बन गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि हर दस से बीस मिनट पर बिजली गुल हो जा रही है। गर्मी में ट्रांसफार्मर भी जल जा रहे हैं। मई महीने में अभी तक करीब 150 ट्रांसफार्मर जल चुके हैं। ट्रांसफार्मर जलने पर उपभोक्ताओं को एक से दो दिन तक बिजली का इंतजार करना पड़ रहा है।
उल्टी-दस्त-डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी : भीषण गर्मी की वजह से अस्पतालों में उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। खानपान में जरा भी लापरवाही बीमार कर दे रही है। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 930 मरीज पहुंचे थे। इनमें अधिकतर उल्टी-दस्त, डायरिया और बुखार से पीड़ित थे। डॉक्टर लोगों से कड़ी धूप और गर्म हवा में निकलने से बचने और खानपान में परहेज की सलाह दे रहे हैं। अखर रही हरियाली की कमी: भीषण गर्मी के बीच शहर में हरियाली की कमी लोगों को अब खूब अखरने लगी है। कभी पेड़ों और जलाशयों से घिरा रहने वाला शहर अब कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होता जा रहा है। बढ़ते तापमान और चिलचिलाती धूप के बीच लोगों को छांव तक नसीब नहीं हो रही है। कंपनीबाग चौराहे पर मौजूद बालचंद्र तिवारी ने बताया कि करीब 20 साल पहले तक शहर के हर मोहल्ले में पेड़ और छोटे-बड़े जलाशय हुआ करते थे। गर्मी के दिनों में यही हरियाली राहत देती थी, अब जलाशयों और पेड़ों की जगह कंक्रीट की कॉलोनियों और चौड़ी सड़कों ने ले ली है। शहर में सड़कें तो चौड़ी और चमकदार बन गईं लेकिन किनारों से हरियाली गायब हो गई। बड़ेवन से कंपनीबाग फोरलेन, कचहरी चौराहा से अस्पताल चौराहा होते हुए गांधीनगर मार्ग तथा फव्वारा से रोडवेज बस स्टेशन तक मालवीय मार्ग पर कहीं भी छांव नहीं है। स्थिति यह है कि बाइक सवार कड़ी धूप में गाड़ी खड़ी करके कुछ देर रुकना चाहें तो कहीं गुंजाइश नहीं है।
उपकेंद्रों के चक्कर लगाना मजबूरी : लगातार बिजली कटौती से परेशान होकर लोग उपकेंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। बैरियहवां, मुरलीजोत, पिकौरा दत्तूराय समेत पॉश कॉलोनियों में शुमार खीरीघाट, संतपुर, लखनऊरा, हंडिया, मरवटिया और महुरड़ क्षेत्रों में रात के समय बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में सोते समय अचानक बिजली कट जा रही है और एक-दो घंटे बाद ही बहाल हो रही है। कई बार तो पूरी रात बिजली नहीं आती, जिससे नींद पूरी नहीं हो पा रही है।