यज्ञ सभी प्राणियों के लिए समान रूप से तृप्ति देने वाला कर्म है। इस यज्ञ कर्म के माध्यम से सबसे कम साधन और समय में अधिकाधिक लोगों को संतुष्ट और लाभान्वित किया जा सकता है। इसमें बलवर्धक, पुष्टिकारक, रोगनाशक और सुगन्धिकारक औषधियां मिलाकर यज्ञ करते हुए समूचे समाज को सुखी करते हैं। ये बातें आचार्य संजीव रूप से कहीं। वह आर्य समाज नई बाजार बस्ती के 45वें वार्षिकोत्सव पर यजमानों को वैदिक यज्ञ की प्रेरणा दे रहे थे।
प्रत्येक घर में रोज खाद्य तेल या घृत का दीपक जलाना दीप यज्ञ कहलाता है। आचार्य संजीव ने बताया कि अथर्ववेद कहता है कि मनुष्य को योग्य है कि योगासन प्राणायाम आदि से शरीर की, वेदादि ग्रंथों से मन को एवं इन दोनों के प्रयोग से धन की शुद्धि करके जीवन को मोक्ष की ओर ले जाए। कहा कि ईश्वर में मन लगाकर भजन करना चाहिए। भजन आत्मा के बल को बढ़ाता है। भय को भगाता है और सोये भाग्य को जगाता है। ईश्वर संसार के कण-कण में विद्यमान हैं। सबके मन में रहते हैं। पं. मुकेश आर्य ने ‘होता है सारे विश्व का कल्याण यज्ञ से’ भजन प्रस्तुत कर यज्ञ के महत्व को समझाया। इस मौके पर अरविन्द श्रीवास्तव और पं. दिनेश शास्त्री ने श्रोताओं को ऋषि गीत सुनाकर लोगों को महर्षि दयानन्द के सुकर्मों की याद दिलाई। संचालन आचार्य देवव्रत आर्य ने किया। अंत में ओम प्रकाश आर्य ने अपनी बात रखी। मुख्य यजमान ओंकार, रजनी आर्य रहे, जबकि प्रवीण, कंचन अग्रवाल, देवव्रत, सुनीता आर्य, प्रभाकर, सत्या मिश्र, राजेश शोभा आर्य, शशिकला श्रीवास्तव, नीलम सिंह, सरोज त्रिपाठी, निर्मला श्रीवास्तव एवं नमन गोयल ने आहुतियां डालीं। इस मौके पर रणजीत सिंह, हरिपति पांडेय, नागेन्द्र, सन्तमिलन चौधरी, मुरलीधर भारती, विश्वनाथ प्रसाद, सुभाष चन्द्र विद्यार्थी, अंगिरा कुमार, वशिष्ठ गोयल, उर्मिला सोनी, कलावती शर्मा आदि मौजूद रहे।