बस्ती। केंद्रीय एवं प्रांतीय नेतृत्व में आह्वान पर मंगलवार को दवा व्यवसायी पूर्ण बंदी में शामिल रहे। हड़ताल के चलते जिले की 1836 दवा की दुकानों पर दिन भर ताले लटके रहे। जरूरतमंद परेशान रहे तो अस्पताल में मरीजों का रेला लगा रहा।
मंगलवार सुबह बंदी के समर्थन में अस्पताल चौराहा स्थित बीसीडीए कार्यालय में दवा विक्रेताओं की बैठक हुई। सरकार की नीतियों के विरोध में नारे लगाए गए। संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से भेजा गया। देशव्यापी बंद के समर्थन में बस्ती केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले आंदोलन में उतरे व्यवसायियों ने दिनभर दुकानें बंद रखीं। बीसीडीए अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार से कई बार दवा मूल्य नियंत्रण नीति पर केंद्रीय नेतृत्व चर्चा कर चुका है, मगर कोई हल नहीं निकला। बिना किसी तैयारी के सरकार ने ई-पोर्टल जैसी दुरूह व्यवस्था थोप दी। यह व्यवस्था अभी संभव नहीं है। इससे दवाओं की भारी कमी हो जाएगी। संगठन मंत्री इंद्रमणि पांडेय ने कहा कि नई दवा मूल्य नियंत्रण नीति से तमाम दुकानों पर ताला लग जाएगा, जिससे हजारों लोग बेरोजगार होंगे। बैठक को योगेेश भाटिया, प्रदेश कार्य समिति सदस्य आशुतोष राय, फुटकर कमेटी के अध्यक्ष पवन मल्होत्रा ने संबोधित किया। इस दौरान अरविंद सिंह, संदीप कुमार मिश्र, मनोज सिंह, बेलाल अहमद, अजय सिंह, रजनीश जायसवाल, राजेश पाल, शिव मूरत मिश्र, कृष्ण गोपाल, दीपक श्रीवास्तव, राम गोपाल, श्रवण दूबे, विजय पांडेय, राकेश पांडेय, अजय गुप्त आदि मौजूद रहे।
विरोध के मुख्य बिंदु
फार्मासिस्ट की अनिवार्यता।
ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण नहीं होना।
ई-पोर्टल व्यवस्था जबरन लागू करना।
दवा मूल्य नियंत्रण नीति में संशोधन करने का विरोध।
सरकार की नीतियों से हजारों लोगों के बेरोजगार होने का खतरा।
हड़ताल से हलकान हुए जरूरतमंद
ओडवारा से दवा लेने जिला चिकित्सालय पहुंचे राम कुमार ने बताया कि वे शहर के कई दुकानों पर दवा लेने गए, मगर दुकान न खुलने के कारण दवा नहीं मिल सकी है। अब जैसे-तैसे काम चलाएंगे।
बच्चे का इलाज कराने आए बुधा गांव निवासी हरिश्चंद्र ने बताया कि बच्चे को तेज बुखार है। चिकित्सक को दिखा दिया, मगर उनके नर्सिंग होम पर दवा की दुकान बंद थी, जिससे खासी दिक्कत हुई है।