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हृदय रोग और कैंसर की दवाएं यहां हैं ही नहीं

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सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। सरकार फ्री इलाज कराने का दम भर रही है, मगर व्यवस्थागत खामियों के चलते सरकार की मंशा पर जिला अस्पताल में पानी फिर रहा है। सभी आवश्यक दवाएं यहां मौजूद हैं, मगर हृदयरोग व कैंसर से पीड़ितों को यहां दवा मिलनी मुश्किल है। क्योंकि अस्पताल में इन बीमारियों के डॉक्टर नहीं हैं तो दवा की भी यहां जरूरत नहीं पड़ती। यही नहीं हर दिन आधा दर्जन आपरेशन होते हैं, मगर इनके मरीजों के लिए दवा से लेकर सर्जिकल सामान बाहर से ही आता है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अस्पताल में एक्सरे की व्यवस्था है, मगर डॉक्टर बाहर से ही कराने की मरीजों को सलाह देते हैं। 
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कागज में जिला अस्पताल के हालात बेहद अच्छे हैं, मगर धरातल पर इसकी स्थिति ठीक नहीं। सारी दवाएं अस्पताल में मौजूद हैं, मगर यहां के डॉक्टर मरीजों को ज्यादातर बाहर की ही दवा लिखते हैं। इसे लेकर शहर के बृजवासी शुक्ल तो लगातार मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की हैं। वह अस्पताल में ईएनटी डॉक्टर को दिखाने गए तो उन्हें वहां बैठे कुछेक बाहरी लोगों ने दवा की पर्ची थमा दी। इसकी शिकायत जब हुई तो औपचारिकता निभाते हुए जांच शुरू कर दी गई और फिर पीड़ित का बयान दर्ज कर फाइल बंद कर दी गई। ईएनटी डॉक्टर आज भी अपनी वाली कर रहे हैं। यही हाल अस्पताल के कुछ डॉक्टरों को छोड़ कर अन्य का भी है।  
दूसरा मामला वाल्टरगंज क्षेत्र के बसडिलिया का है। यहां छह साल की आदीबा छत से गिर गई। उसके हाथ व जबड़ा में फ्रैक्चर हो गया। जिला अस्पताल में उसे परिवार के लोगों ने भर्ती कराया। डॉक्टर ने जांच-पड़ताल की तो उसके सिर व हाथ के एक्सरे के लिए बाहर कराने की सलाह दे दी। तीमारदार फिरोज अहमद ने आरोप लगाया कि डॉक्टर तो केवल कच्चा प्लास्टर कर वार्ड में भेज दिए। यहां सलाह दी गई कि बाहर से एक्सरे आदि कराकर लाएं। करीब एक हजार रुपये खर्च हो गए, मगर इलाज भी ठीक ढंग से होगा, यह विश्वास नहीं होता। मुंडेरवा के विशाल पांडेय के पिता हरिराम पांडेय बताते हैं कि उनका नाती पेड़ से गिर गया। उसे फ्रैक्चर हुआ है। यहां आपरेशन के लिए डॉक्टर बताए। आपरेशन में न तो अस्पताल से दवा दी गई और न कोई सामान सब कुछ बाहर से ही खरीद कर लाए हैं। धर्मपुरा की गायत्री के पति साइकिल से गिर गए। घुटने का ऑपरेशन हुआ। डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया। गायत्री बताती हैं कि यहां अब तक दस हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। दवा सहित सभी सामान बाहर से ही लिया है। संतकबीरनगर के पंकज शुक्ल के पिता को चोट लगी थी ऑपरेशन हुआ। पंकज बताते हैं यहां सब कुछ बाहर से ही होता है। केवल भवन व ऑपरेशन थियेटर का पैैसा नहीं लगता।
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आज ही चार्ज लिया हूं। अस्पताल की व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जाएगा। सभी दवाएं अस्पताल से ही मरीजों को उपलब्ध कराई जाएंगी। किसी भी डॉक्टर के पास यदि दलाल नजर आए तो कार्रवाई होगी।
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-डॉ. ओपी सिंह, प्रमुख अधीक्षक।  
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