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मेडिकल कचरे का जिले में होगा निस्तारण

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सांसों में धुल रहा मेडिकल वेस्ट का जहर
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बस्ती। 
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मेडिकल वेस्ट (कचरा) के निस्तारण के लिए दूसरे जिलों का मुंह देखना पड़ता है। अब जिले के अस्पतालों और नर्सिंग होम के मेडिकल वेस्ट जिला अस्पताल में ही निस्तारित करने की योजना है। इस योजना पर 11.50 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव है। 
इसका प्रस्ताव परियोजना प्रबंधक उप्र. जल निगम ने जिले के स्वास्थ्य विभाग को दिया है। इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी संस्तुति दे दी है। योजना पर 11.50 करोड़ रुपये से अधिक व्यय होगा। इस परियोजना में जिला अस्पताल को अत्याधुनिक ऑक्सीजन सुविधाओं और स्टरलाइजेशन सिस्टम से भी लैस किया जाएगा। 
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लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में निजी अस्पतालों की स्वास्थ्य सुविधाएं आने वाले दिनों में जिला अस्पताल में नजर आएगी। यहां के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में सेंट्रल मेडिकल गैस पाइप लाइन की स्थापना, माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, सेंट्रल स्टरलाइजेशन सिस्टम, मेडिकल बॉयो वेस्ट प्रबंधन तथा हॉस्पिटल लांड्री स्थापित की जाएगी। मेडिकल बॉयो वेस्ट मैनेजमेंट पर 53.38 लाख रुपये तो सेंट्रल मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम पर 9.06 करोड़ रुपये तथा सेंट्रल स्टरलाइजेशन सिस्टम की स्थापना पर 1.10 करोड़ रुपये व्यय का प्रस्ताव है। 
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि शासन की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो मार्च के अंत तक यहां उक्त सिस्टम की स्थापना पर काम शुरू हो जाएगा। मेडिकल बॉयो वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अब तक दूसरे जिले के भरोसे यहां के अस्पताल और नर्सिंग होम रहते थे। इसके अलावा हर बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा भी योजना के क्रियान्वयन के बाद मिलने लगेगी। यही नहीं, स्टरलाइजेशन सिस्टम स्थापना से ऑपरेशन के दौरान होने वाले संक्रमण से मरीजों को बचाया जा सकेगा। 
क्या है स्टरलाइजेशन 
बस्ती। ऑपरेशन अथवा अन्य चिकित्सीय उपकरणों को कीटाणु और विषाणु से मुक्त करने के लिए अपनाए जाने वाली विधि को स्टरलाइजेशन कहते हैं। जिला अस्पताल में इस अत्याधुनिक सिस्टम को लगाया जाएगा। 


चार पीआईसीयू की स्थापना पर सरकार की मुहर
बस्ती। 
बच्चों को जेई-एईएस से निजात को लेकर गंभीर शासन ने जिला मुख्यालय सहित चार स्थानों पर पीडियॉट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानी पीआईसीयू की स्थापना के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके लिए शासन ने प्रत्येक यूनिट पर 1.70 करोड़ रुपये अवमुक्त किया है। चारों यूनिटों की स्थापना मार्च माह के अंत तक करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्वांचल के लिए अभिशाप बने जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की चपेट में अधिकतर बच्चे आते हैं। डॉक्टर के पीछे कारण उनके प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना बताते हैं। इस बीमारी की संवेदनशीलता अप्रैल माह से शुरू हो जाती है। इन स्थितियों को देखते हुए शासन ने सरकार के प्राथमिकताओं में शामिल जेई-एईएस से जंग के लिए अभी से कमर कसनी शुरू कर दी है। बच्चों को इस बीमारी में बेहतर इलाज की सुविधा को लेकर शासन ने ग्रामीण इलाकों में पीआईसीयू स्थापित करने का निर्देश देते हुए स्थान की सूची मांगी थी, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने जिला मुख्यालय सहित गौर, हर्रैया व कुदरहा में पांच-पांच शैय्यायुक्त पीआईसीयू का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर शुक्रवार को शासन ने मुहर लगा दी है। वातानुकूलित इन यूनिटों में वेंटीलेटर, मानीटर, आक्सीजन के अलावा अन्य सुविधाएं व दवाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा प्रत्येक यूनिट को तीन-तीन डॉक्टर 24 घंटे संचालित करेंगे।
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सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने उक्त की पुष्टि करते हुए कहा कि चूंकि अप्रैल जेई-एईएस की शुरुआत अप्रैल माह से हो जाती है। इसलिए शासन ने यूनिट स्थापना के लिए मार्च के अंत तक समय समय निर्धारित किया है। उक्त स्थानों पर इसे स्थापित करने के लिए पूर्व में संचालित इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर भवन का प्रयोग किया जाएगा। जैसे ही मशीनें मिलीं उन्हें स्थापित कर दिया जाएगा।
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