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मार्च क्लोजिंग : ट्रेजरी में दिखा असर...अंतिम दिन 78 करोड़ रुपये के बिल पहुंचे

Tue, 31 Mar 2026 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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- विकास विभाग ने सर्वाधिक 24 करोड़ रुपये का भेजा बिल, देर रात तक पास होते गए, सरेंडर की संख्या कम
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- सुबह 10 बजे से शाम साढ़े छह बजे तक विभागों के पहुंचे बिल को मिला अप्रूवल, डीएम के नेतृत्व में हुआ कार्य

बस्ती। महावीर जयंती के चलते छुट्टी के बावजूद बैंक से लेकर सरकारी कार्यालय खुले रहे। कर्मचारी हिसाब-किताब में लगे रहे। मार्च क्लोजिंग की आपाधापी ट्रेजरी में भी देखी गई। सुबह 10 बजे से शाम साढ़े छह बजे तक विभागों की ओर से बिल पहुंचते गए, जिसे अप्रूव किया जा रहा था। अंतिम दिन 78 करोड़ के बिल पहुंचे, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, ट्रेजरी में देर रात तक बजट खपाने की जुगत लगाई जाती रही।
कई विभागों में वित्तीय वर्ष के पहले बजट जारी हुआ, जिसमें वापस करना पड़ा। कर्मचारियों के वेतन, एरियर और योजनाओं धनराशि के बिल कोषाधिकारी कार्यालय से जारी किए गए। एक अप्रैल से 31 मार्च तक चलने वाले वित्तीय वर्ष में बजट की रकम खर्च करनी होती है। इसके बाद बजट की जो रकम खर्च नहीं होती वह सरेंडर कर दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट को खपाने के लिए पखवाड़े भर से कार्य चल रहा था।
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मंगलवार महावीर जयंती के चलते छुट्टी पड़ गई थी, मगर भुगतान पर जोर रहा। विकास भवन, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सीएमओ कार्यालय, डीआईओएस, लोक निर्माण विभाग में दिन भर हिसाब-किताब होते रहे। बची धनराशि को खर्च करने में अधिकारी लगे रहे। भुगतान के लिए बिल लेकर कर्मचारी तक दिन भर कोषागार के चक्कर काटते रहे। खर्च करने में विकास विभाग आगे रहा। यहां करीब 24 करोड़ से अधिक का बिल पास किया गया।
कोषाधिकारी कार्यालय के मुताबिक स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पंचायत राज, नगर निकाय के बजट का भुगतान किया गया। सीटीओ अशोक प्रजापति ने बताया कि 31 मार्च को 6.30 बजे तक ही बिल स्वीकृत किए गए। इसके बाद बिल प्रस्तुत करने वालों का भुगतान अगले वित्तीय वर्ष में होगा। 78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, आठ करोड़ का बजट विभिन्न विभागों ने सरेंडर कर दिया है।
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डीएम कृत्तिका ज्योत्सना के नेतृतव में ट्रेजरी कर्मी सुबह से देर रात तक भुगतान प्रक्रिया में लगे रहे। शांतिपूर्वक कार्य संपन्न हुआ। वहीं, निबंधन कार्यालय में भी सुबह से शाम पांच बजे तक रजिस्ट्री कार्य हुआ। अंतिम दिन यहां भी गहमा-गहमी जैसा माहौल दिखा।


किन विभागों का कितना हुआ खर्च



विभाग - खर्च

लोक निर्माण विभाग- 5.50 करोड़
वन विभाग- 5 करोड़
सिंचाई विभाग चार करोड़
कृषि विभाग ढाई करोड़
पुलिस विभाग 23 करोड़
स्वास्थ्य विभाग 11.50 करोड़
राजस्व विभाग 2.5 करोड़
विकास विभाग 24 करोड़
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