बस्ती। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमवीवाई) में सेंधमारी का मामला सामने आने पर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। करीब 96 लाख रुपये भ्रष्टाचारियों ने एक हजार से अधिक फर्जी प्रसूता महिला लाभार्थी दिखाकर उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करा दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) नंबर में हेराफेरी करके किया गया है।
बता दें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहले बच्चे के लिए दो किस्तों में पांच हजार रुपये का मातृत्व लाभ प्रदान किया जाता है, और दूसरे बच्चे के लिए छह हजार का मातृत्व लाभ प्रदान किया जाता है, बशर्ते वह संतान लड़की हो। जालसाजों ने इसमें भी सेंधमारी शुरू कर दी और जिले में एक ही झटके में 96 लाख रुपये की गड़बड़ी कर डाली है।
शुरुआती जांच में रुधौली ब्लॉक में सिर्फ सितंबर में सुनियोजित तरीके से 1000 से अधिक फर्जी लाभार्थियों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने की बात सामने आई है। मामला सामने आने पर आनन-फानन में रुधौली ब्लॉक के 133 लंबित आवेदनों को फ्रीज करते हुए भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इसके लिए सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी, सीडीओ समेत कंप्यूटर ऑपरेटर को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
डीपीओ ने बताया कि प्रसूताओं को मदर चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड दिया जाता है जिसमें मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) के तहत 12 अंकों का रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) नंबर होता है। इसी अंक को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभ संबंधी ऑनलाइन आवेदन में भरना होता है। सूत्रों के मुताबिक 12 अंकों वाले इस आरसीएच नंबर में हेरफेर करके आवेदन आगे बढ़ाया गया है और घपले को अंजाम दिया गया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर तक प्रथम बार मां बनीं 3573 प्रसूताओं के खाते में अब तक एक करोड़ 78 लाख 65 हजार और दूसरी संतान पर 2299 प्रसूताओं के खाते में एक करोड़ 37 लाख 94 हजार रुपये की धनराशि इनके खाते में भेजी जा चुकी है।
मुरादाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़ और बिजनौर में भी पकड़े गए मामले : आईसीडीएस के निदेशक की ओर से जारी पत्र में बस्ती के साथ ही मुरादाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़, बिजनौर में भी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में गड़बड़ी पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। लाभार्थी के अलावा दूसरों के खाते में रकम भेजने के संकेत मिले हैं। इस मामले को साइबर अपराध से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है। जांच में पता चला है कि दूसरी संतान के जन्म पर एकमुश्त मिलने वाली छह हजार की रकम में ही जालसालों ने खेल किया है।
सिर्फ प्रारंभिक जांच में ही पकड़ी जा सकतीं हैं खामियां : जिन प्रसूताओं के खाते में पहली बार में पांच हजार और दूसरी संतान बेटी पैदा होने पर छह हजार रुपये की रकम भेजी जाती है, उसकी जांच यदि प्रारंभिक स्तर पर ही यानी आंगनबाड़ी, सुपरवाइजर व सीडीपीओ स्तर से हो तो गड़बड़ी पकड़ जा सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के बाद किसी के बाद कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब विभाग ने सख्ती जताते हुए अभिलेख सुरक्षित रखने के निर्देश दिए है। बताया जा रहा है कि तकनीकी दिक्कत यह भी है कि फीडिंग के बाद कोई भी अधिकारी पोर्टल से अभिलेख आदि की जांच नहीं कर सकता है।