खुद को बनाएं ‘अपराजिता’, पुलिस भी साथ
रुधौली (बस्ती)। महिलाएं खुद को कमजोर न समझें। जागरूक बनें और और समस्याओं का डटकर मुकाबला करें। अगर महिलाएं डरेंगी तो अराजकतत्वों को हौसला बढ़ेगा। राह में शोहदे छेड़ें तो उसे मुंहतोड़ जवाब दें। यूपी 100, 1090, 181 पर फोन कर परेशानी बताएं। पुलिस आपकी मदद करेगी। ये बातें पुलिस उपनिरीक्षक राजन मिश्रा ने शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज गोठवा में आयोजित पुलिस की पाठशाला में कहीं।
राजन मिश्रा ने कहा कि अगर कोई आप को सात मिनट तक घूरकर देखता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती हैं। गुडमॉर्निंग पुलिस और एंटी रोमियो स्क्वॉड के बारे में भी जानकारी दी। उपनिरीक्षक ने छात्राओं से कहा कि वे अपने परिवार के लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करें। कार्यक्रम के दौरान 125 छात्राओं को महिला अपराधों का विरोध करने एवं आसपास की महिलाओं को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान शिक्षक बुद्धि सागर पांडेय, अकबाल हुसैन, जितेंद्र पांडेय, कृष्ण मुरारी यादव, दीनानाथ पाठक, हरिप्रसाद, राजेंद्र कुमार मिश्रा, धर्मेंद्र वर्मा, हार्दिक कुमार, गौरीश कुमार, ब्रिजबिहारी पांडेय, शिवदास आदि मौजूद रहे।
बेबाकी से पूछे सवाल
पुलिस की पाठशाला में छात्रा मनीषा विश्वकर्मा, गजाला, सुष्मिता सिंह, रिशू, अंकिता, प्रिंसी, ममता ने सोशल साइट्स के इस्तेमाल में सावधानी, साइबर क्राइम, शराब पर पाबंदी नहीं लगाए जाने से जुड़े सवाल पूछे।
महत्वपूर्ण जानकारी मिली
कॉलेज की छात्रा सुष्मिता ने कहा कि कार्यक्रम में पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी मिली। सोशल साइट्स के इस्तेमाल में सावधानी बरतने के बारे में भी जानकारी मिली।
महिलाओं को जागरूक करूंगी
छात्रा सोनिका दुबे ने कहा कि साइबर क्राइम के क्रम में एटीएम से जालसाजी, फर्जी कॉल्स इत्यादि के बारे में दी गई जानकारियां अहम रहीं। घर के अन्य सदस्यों एवं आसपास के लोगों को इसके लिए जागरूक करूंगी।
महत्वपूर्ण है अपराजिता
कॉलेज की छात्रा मोनिका ने कहा कि यूपी 100, 1090, 181 के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। सबसे खास रहा यूपीकॉप एप जिसके माध्यम से हम घर बैठे ही अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
होने चाहिए ऐसे कार्यक्रम
कॉलेज की प्रधानाचार्य सीता गुप्ता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए। महिलाओं एवं छात्राओं के प्रति लगातार बढ़ रहे अपराधों पर रोकथाम के लिए सिर्फ छात्राओं को जागरूक करने से पूर्ण सफलता नहीं मिल पाएगी, इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक किया जाना चाहिए। यदि बालिकाएं शिकायत करना चाहती हैं तो अभिभावक मान-सम्मान का हवाला देते हुए शांत करा देते हैं।