मुंडेरवा। जीवन में इन्सान को वहीं तक झुकना चाहिए, जहां तक रिश्तों में मान और मन में आत्मसम्मान बना रहे। रिश्तों में प्रेम, अपनापन, संवाद और सम्मान का होना बेहद जरूरी है। ये बातें मुंडेरवा कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथा वाचिका प्रतिमा त्रिपाठी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि जिनकी मति और गति अर्जुन जैसी होती है, उनका रथ आज भी प्रभु श्रीकृष्ण ही चलाते हैं। जीवन में सच्चे रिश्ते वही होते हैं, जिनमें व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी उसके प्रति प्रेम, अपनापन और सम्मान बना रहे। रिश्तों की मजबूती आपसी विश्वास और सम्मान पर निर्भर करती है। इसलिए हर व्यक्ति को संबंधों में मर्यादा बनाए रखते हुए एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन में प्रेम, सद्भाव और आत्मसम्मान के महत्व का संदेश दिया गया। अमरनाथ यादव, बलवंत, भरथरी, विशाल यादव, जोखन अग्रहरि, लक्ष्मण मौर्य, विनोद जायसवाल, राम प्रवेश शर्मा, रमेश मौजूद रहे। संवाद