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महादेवा का सत्ता सौंपने का तमगा बरकरार

Sat, 11 Mar 2017 11:30 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
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फाइल फोटो नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला
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महादेवा विधान सभा के परिणाम पर सभी की निगाहें थीं। क्योंकि इस सीट को लेकर किवदंती जो जीता उसी की सरकार बनती है को लेकर बहस छिड़ी थी। अब जबकि परिणाम घोषित हो चुका है और भाजपा की सरकार बननी तय हो गई है तो महादेवा की किवदंती एक बार फिर से सच साबित हुई। 
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इस सीट पर 1952 से 1974 तक कांग्रेस के विधायक निर्वाचित होते रहे और इस दौरान कांग्रेस प्रदेश में सत्तासीन रही। वर्ष 1977 में पहली बार यहां कांग्रेस परास्त हुई और जनता पार्टी के उम्मीदवार गिरधारी लाल विजयी हुए तो सरकार भी बदल गई और पार्टी सत्ता में पहुंच गई। 1979 से लेकर 1984 तक दो बार यहां से कांग्रेस का विधायक और प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी थी। 1989 में परिवर्तन की आंधी में यहां जनता दल से रामकरन आर्य विधायक बन गए और मुलायम सिंह यादव प्रदेश में सरकार बना ली। 1991 में भाजपा से वेद प्रकाश जीते और कल्याण सिंह की सरकार प्रदेश में बन गई। 1993 में सपा की टिकट पर रामकरन की साइकिल दौड़ी तो सपा की सत्ता में पहुंच गई। 1996 में बसपा की हाथी से वेद प्रकाश ने मैदान मारा। प्रदेश में बसपा की सरकार मायावती के नेतृत्व में बन गई। 2002 में थोड़ी सी स्थितियां बदलीं और सपा प्रत्याशी राम करन जीत गए। सपा बड़ा दल बन कर उभरा मगर उसे सत्ता नहीं मिल सकी। भाजपा व बसपा ने मिलकर सरकार बना लिया, मगर यह सरकार महज कुछ ही महीनें चल सकी और फिर सपा सत्ता में पहुंच गई। 

2007 में यहां बसपा से दूधराम विजयी हुए तो मायावती सरकार बना लीं। 2012 में फिर से यहां की जनता ने रामकरन को सिर आंखों पर बैठाया तो सत्ता भी सपा की ही बन गई। इन स्थितियों ने यह साबित कर दिया कि जिस दल का उम्मीदवार महादेवा सीट पर विजयी होगा वही पार्टी सरकार बनाएगी। यह इतिहास अभी बदलने वाला नहीं है। क्योंकि इस बार यहां विधान सभा का चुनाव भाजपा के रवि सोनकर ने जीता है और प्रदेश में भाजपा की सरकार बननी तय हो गई है।
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