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Basti News: कीमत कम...कस्बों में मिलावटी पनीर का बड़ा धंधा

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इसी वाहन से नकली पनीर की कर रहे थे आपूर्ति स्रोत विभाग
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बस्ती। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ही नहीं अब पुलिस भी मिलावटी पनीर पकड़ रही है। जिले में एक बार फिर गनेशपुर में पनीर आपूर्ति के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। बताया गया कि सस्ते दाम पर पनीर की आपूर्ति करने वाला गिरोह लंबे समय से जिले में सक्रिय है।
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लेकिन बस्ती में मिलावटी पनीर फैक्टरी के पकड़े जाने के बाद धंधेबाजों ने अपना पैतरा बदला और दूसरे जिले से मिलावटी पनीर मंगवाकर खपा रहे हैं। बताते हैं कि शादी-समारोह, होटल-ढाबों से लेकर गांव-कस्बे की छोटी-बड़ी किराने की दुकानों तक इसकी आपूर्ति पहुंच रही है। जनपद में बाहर से मंगवाए गए बड़ी मात्रा में तैयार पकड़ी गई पनीर ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
पनीर की बरामदगी ने इस बात की पुष्टि की है कि जनपद में बाहरी खाद्य पदार्थों के जरिये बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल होता है। जानकारों ने बताया कि हाल ही में जिले के रोडवेज स्थित पकड़ी गई मिलावटी पनीर फैक्टरी के बंद होने पर यहां धंधा मंद पड़ा तो बाहरी जिले से पनीर की आपूर्ति करवाने लगे हैं। बताते हैं कि पनीर हर सीजन और हर वक्त उपलब्ध कराने वाले गिरोह का नेटवर्क हर बाजार में है।
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थर्माकोल बॉक्स में भरकर मिलावटी मिलावटी पनीर खपा रहे हैं। इसके लिए उन्हें मोटा मुनाफा मिल रहा है। बताते हैं कि जो लोग पनीर की आपूर्ति करते हैं उसमें चुनिंदा लोग जुड़े हैं। क्योंकि, फैक्टरी तक खरीदार को नहीं लाया जाता था। अंदर उसकी नजर पड़ती तो धंधे पर ग्रहण लग जाता इसलिए, मालिक, कॅरियर, काम करने वाले अन्य लोगों के अलावा यहां कोई नहीं आता था।
डिमांड कितनी हो, एक घंटे में मिल जाएगा ऑर्डर : सूत्रों से पता चला है कि डिमांड कितनी भी हो, पनीर की आपूर्ति हो जाती है। सूत्रों की माने तो लगन में 30 से 35 क्विंटल की खपत थी। अब सीजन खत्म होने पर पनीर की खपत कम हुई। इससे धंधेबाज भी अब नया तरीका अपना रहे हैं।
बताते हैं कि आर्डर करते ही एक घंटे में पनीर की आपूर्ति कर देते हैं। वहीं, नेटवर्क की बात करें तो जनपद के हर्रैया, गनेशपुर, रुधौली, कुदरहा, कप्तानगंज, भानपुर, बभनान बाजार तक फैला है। यहां पनीर गोपनीय रास्ते से पहुंचाते हैं, ताकि पुलिस और विभाग की रडार से बच निकलें।
हलवाई करते हैं सहयोग : पैठ और कारोबार का दायरा बढ़ाने में सबसे अधिक सहयोग हलवाई करते थे। जो कुछ तो दिल्ली में रहते हैं जो लगन शुरू होते ही आ जाते और कुछ नियमित यहीं रहते हैं। जहां उनका सट्टा होता है, मालिक से कहते हैं कि हमारे यहां अच्छा और सस्ता पनीर मिल जाएगा। क्वालिटी अच्छी रहेगी। इस प्रकार सप्लाई और बढ़ जाती है। सहालग खत्म होने पर अब छोटे-छोटे दुकानों से संपर्क कर वहां पनीर रखवा रहे हैं। इसकी पुष्टि गनेशपुर बाजार में पकड़ी गई पनीर से होती है।
दूध में रसायन व पाउडर का प्रयोग अधिक : विशेषज्ञों के अनुसार दूध का इस्तेमाल बहुत कम या नगण्य हाइड्रोजनाइज्ड फैट, आर्टिफिशियल थिकनर, ब्लिचिंग सामग्री, जमाने के लिए केमिकल का उपयोग करते थे। सर्जन डॉ. विजय तिवारी के अनुसार मिलावटी मिलावटी पनीर स्वास्थ्य के लिए घातक है।
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