बदहाल पड़ा रेलवे की लाइब्रेरी-संवाद
पुरानी बस्ती। गोरखपुर- गोंडा रेल रूट का महत्वपूर्ण स्टेशन बस्ती नए अंदाज में तैयार किया जा रहा। अमृत भारत योजना में इस स्टेशन को शामिल कर विभिन्न विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। वहीं स्टेशन पर उपलब्ध संसाधनों की बात करें तो किल्लत बनी हुई है। ऐसा ही बस्ती रेलवे पुस्तकालय स्थिति है जो अपना अंतिम सांसें गिन रहा है।
जनपद के प्रख्यात साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल के सम्मान में रेलवे पुस्तकालय को उनका नाम तो दिया गया, लेकिन उनकी किताबें भी पुस्तकालय में नहीं हैं। सिर्फ 3000 किताबों के सहारे यह पुस्तकालय जैसे-तैसे दो घंटे के लिए खुलता है। बस्ती रेलवे स्टेशन 1872 में बनाया गया था। उस समय किताबों का महत्व हुआ करता था और लोग अच्छी किताबों की तलाश कर पढ़ने का वक्त निकालते थे।
पुस्तकों के प्रति लोगों की रुचि को देखते हुए आजादी के बाद रेलवे ने स्टेशन पर पुस्तकालय शुरू किया। जिसे क्षेत्र के अगोना निवासी प्रख्यात साहित्यकार व आलोचक रामचंद्र शुक्ल का नाम दिया। कस्बा निवासी व भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पवन कसौधन ने बताया कि 30 साल पहले यह पुस्तकालय शहर के पढ़ाकू माने जाने वालों का प्रमुख अड्डा हुआ करता था, लेकिन बाद में यह पुस्तकालय सिर्फ रेलकर्मियों तक ही सिमट कर रह गया।
मौजूदा वक्त में आरपीएफ थाना के पीछे रेलवे कालोनी के एक बदहाल भवन में संचालित इस पुस्तकालय में इस वक्त महज 3000 पुरानी किताबें ही उपलब्ध है। यहां तक की आचार्य शुक्ल के लिखित क्रोध, चिंतामणि व मित्रता सरीखी किताबें तक यहां नहीं हैं।