बस्ती। छह सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर सदर तहसील के लेखपालों ने तहसील परिसर में धरना दिया। धरने की अध्यक्षता सदर तहसील अध्यक्ष अशोक कुमार तिवारी और संचालन मंत्री धमेंद्र कुमार ने किया। धरने पर पदाधिकारियों ने जायज मांगों को न मानने के लिए सरकार को जमकर कोसा, कहा कि सरकार की हठधर्मिता के चलते आज लेखपालों को धरने जैसा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
कहा कि सरकार ने अगर समय रहते उनकी मांगों को नहीं माना तो इसका प्रभाव विधान सभा के चुनाव में पड़ेगा। लंबित मांगों को न माने से रोष प्रगट किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए लेखपाल नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के चलते लेखपालों को हड़ताल करने के लिए बाध्य होना पड़ा। कहा कि एसीपी की विसंगतियां, वेतन उच्चीकरण, अनिवार्य शैक्षिक अहर्ता बढ़ाने, मंडलीय कैडर और स्थानान्तरण नीति में संशोधन करने, पदोन्नाति और पुरानी पेंशन को लागू करने में काफी दिनों से हीलाहवाली कर रही है। कहा कि बाध्य होकर लेखपालों को हड़ताल करना पड़ रहा है। कहा कि एक ही समय लेखपालों को कई स्थानों पर कार्यों को निपटाने का कार्य कर रहे हैं, और सरकार इसके एवज में मात्र सौ रुपये का पेट्रोल भत्ता देती है। कहा कि सरकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 1800 रुपये का वेतनमान देती है और लेखपालों को महज दो हजार का वेतन देती है। जुगुल किशोर वर्मा ने बताया कि 16 अगस्त को सभी तहसील मुख्यालयों पर हड़ताल रहेगी। 17 से 22 अगस्त तक काला फीता बांधकर जनपद के लेखपाल विरोध जताएंगे, और 23 से 29 अगस्त तक जनपद के सभी लेखपाल जनपद मुख्यालय पर एकत्रित होकर हड़ताल पर रहेंगे। उसके बाद 30 अगस्त को प्रदेश भर के लेखपाल विधानसभा का घेराव करेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार लेखपाल संवर्ग के साथ अन्याय कर रही है। इस मौके पर कोषाध्यक्ष शिव मूरत प्रसाद, उपाध्यक्ष विजय कुमार श्रीवास्तव, उप मंत्री शंकर, सहदेव वर्मा, सुरेश उपाध्याय, अजय वर्मा, जियालाल, अजय श्रीवास्तव, रमेश श्रीवास्तव, राम सिंगार, रविंद्र, लक्ष्मण प्रसाद, जयराम गौतम, रामसागर और मनोज उपाध्याय, सुनील तिवारी, हीरालाल, गंगा प्रसाद, महेंद्र सिंह, जैराम गौतम, दयाराम चौधरी, राम सजीवन गुप्त, अनिल मिश्र, देवेंद्र पाल, ईश्वरचंद्र, रामरेखा, विनोद श्रीवास्तव, हरि ओम, मुरली मनोहर श्रीवास्तव, सुनील कुमार पांडेय सहित अन्य लेखपाल मौजूद रहे।