बस्ती। पीसीपीएनडीटी के मामले में स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्रवाई मरीजों पर भारी पड़ सकती है। बिना चिकित्सक के हस्ताक्षर के लंबे समय से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट जारी करने वाले बहुचर्चित अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक को विभाग ने महज चेतावनी देकर अपराध की फाइल को बंद कर दिया है। इस हल्की कार्रवाई के बाद विभाग अब सवालों के घेरे में है।
जिला अस्पताल-कैली रोड पर संचालित डॉयग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ सीएमओ को यह शिकायत मिली थी कि वहां से जो अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट जारी हो रही है, उस पर किसी चिकित्सक के हस्ताक्षर ही नहीं रहते हैं, जबकि सेंटर पर कई चिकित्सकों का नाम दर्ज हैं। हैरत तो इस बात पर है कि इस सेंटर पर जांच के लिए भेजने वाले चिकित्सकों ने भी कभी बिना हस्ताक्षर जारी हो रही रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठाए, नतीजा यह रहा कि लंबे समय से बिना किसी चिकित्सक के हस्ताक्षर के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मरीजों को थमा दी जा रही थी।
यह खेल जानबूझकर किया जा रहा था, या भूलवश हो रहा था, लेकिन मरीज को बिना हस्ताक्षर जो रिपोर्ट दी जा रही थी, अधिकारिक रूप से उसका कोई महत्व नहीं रहता है। किसी साक्ष्य के रूप में उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
लोगों का कहना है कि केंद्र संचालक को इतने बड़े अपराध की बहुत छोटी सजा दी गई है, जिसका कोई महत्व नहीं है।