-1990 के राममंदिर आंदोलन की यादों से आज भी रोमांचित हो उठते हैं कारसेवक
- बस्ती,गोरखपुर व देवरिया जेल में कटी कई रातें, पुलिस की लाठी भी खाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गौर, बस्ती। अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चारों तरफ उत्साह का माहौल है, लेकिन श्रीराम मंदिर आंदोलन के लिए वर्ष 1990 में पुलिस की लाठी और जेल की हवा खानेवाले कारसेवक प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र नहीं मिलने से दुखी हैं। हालांकि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बहाने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संस्मरणों को याद कर फिर रोमांचित हो उठते हैं। वे बताते हैं कि कैसे वे कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे या पुलिस ने कैसी यातनाएं उन्हें दीं।
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आठ अक्टूबर 1990 को मंदिर आंदोलन के लिए अयोध्या जाते समय पैकोलिया पुलिस ने हर्रैया के पास से गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय जो लोग भगवा वस्त्र पहने हुए थे उनके साथ पुलिस ज्यादा सख्ती बरत रही थी। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों को पहले बस्ती, फिर गोरखपुर और देवरिया में रखा। इस तरह लगभग 26 दिन जेल में काटने पड़े। बजरंग दल के प्रखंड संयोजक चंद्रशेखर कमलापुरी खेत-खलिहान के रास्ते किसी तरह से हर्रैया तिराहे पर पहुंचे लेकिन वहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तमाम यातनाओं के बावजूद मंदिर आंदोलन का उत्साह कम नहीं हुआ। वह पल आज भी जब याद आते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
हरिश्चंद्र पांडेय परासडीह-गौर
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मंदिर आंदोलन के लिए तीस दिन तक जेल काटने के बाद भी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में निमंत्रण नहीं मिला। इसको लेकर मन दुखी है। आज भी वह दिन याद है, जब अयोध्या में कर्फ्यू लगा था। पुलिस से बचने के लिए लोग पैदल चलकर किसी तरह से अयोध्या पहुंच रहे थे। उस समय पुलिस से कहासुनी, धक्कामुक्की तक हुई थी। आज मन प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से काफी उत्साहित है।
चंद्रभान शुक्ल रेलवे स्टेशन चौराहा-गौर
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छह दिसंबर 1992 को पैकोलिय थानाध्यक्ष जबरन गौर व बभनान क्षेत्र के कारसेवकों को जेल भेज रहे थे, जिसका हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया। उस समय के हालात ऐसे थे कि घरों से निकलना मुश्किल हो गया था। उस वक्त अगर पुलिस को पता चल जाता कि कोई भगवाधारी है या कारसेवा में जा रहा है तो फौरन गिरफ्तार कर लेती थी। 15 दिन देवरिया जेल में रहने के बाद गोरखपुर के बशारतपुर में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया।
पप्पू प्रजापति-बभनान