कलवारी (बस्ती)। कई जिलों को आपस में जोड़ने वाला कलवारी-टांडा पुल मरम्मत कार्य की गति कमजोर पड़ गई है। निर्माण कार्य में लंबा वक्त लगने से राहगीर परेशान हैं। उन्हें वैकल्पिक मार्ग अयोध्या या फिर बिडहर घाट रूट से सफर करना पड़ रहा है। इससे गंतव्य तक पहुंचने के लिए 65 किमी. दूरी अधिक पड़ रही है।
सरयू नदी पर बने टांडा-कलवारी पुल के मरम्मत कार्य को लेकर आमजन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 12 सितंबर से शुरू हुआ मरम्मत कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। पुल पर इस समय अंतिम लेयर (फाइनल लेयर) डालने का कार्य जारी है, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार अभी काम काफी अधूरा है। करीब सवा दो किलोमीटर लंबे इस पुल पर फिलहाल दो पहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दी गई है, इससे स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिली है, हालांकि चार पहिया और बड़े वाहनों को अभी इंतजार करना पड़ेगा।
विभागीय सूत्रों की माने तो मार्च माह तक ही चार पहिया वाहनों का संचालन संभव हो पाएगा।
पुल पर कार्य कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि मरम्मत की प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही है। तकनीकी कारणों और लेयरिंग कार्य में सावधानी के चलते काम को चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, जिससे समय बढ़ गया है।
गौरतलब है कि सरयू नदी पर बना टांडा-कलवारी पुल बस्ती और अंबेडकर नगर ही नहीं, बल्कि कई अन्य जनपदों आजमगढ़, जौनपुर, प्रयागराज समेत वाराणसी को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क पुल मार्ग है।
पुल के बंद या सीमित संचालन के कारण व्यापार, आवागमन और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मरम्मत कार्य में तेजी लाएं और पुल पर आवागमन समय-सीमा स्पष्ट हो, ताकि लोगों को राहत मिल सके।