कबीर हत्याकांड के सवा सौ लोगों पर गिर सकती है गाज
सोमवार को शासन ने ट्रिब्यूनल को दी मंजूरी
नौ अक्तूबर को कबीर की हत्या के बाद हुई थी तोड़फोड़
बस्ती। प्रदेश सरकार के सार्वजनिक संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश की पहली गाज जिले के उन सवा सौ उपद्रवियों पर गिर सकती है, जिनका नाम नौ अक्तूबर को छात्रनेता कबीर तिवारी की हत्या के बाद शहर में हुए उपद्रव में आया था। कोतवाली थाने में दर्ज चार मुकदमों में पुलिस ने इनके खिलाफ उपद्रव और तोड़फोड़ करने का एफआईआर दर्ज किया था। चार्जशीट भी न्यायालय भेजी जा चुकी है। शासन ने सोमवार को उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली अभिकरण बना दिया है। ऐसे में तय हो गया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान करने वालों को राहत नहीं मिलने वाली है।
वर्ष-2011 में इसे लेकर गृह विभाग ने भी शासनादेश जारी किया था, जिसमें एडीएम वित्त के जरिए यह कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाती है। इसके बाद यूपी सरकार सीएए विरोधी आंदोलन के बाद अध्यादेश लाई थी। उससे संबंधित लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली नियमावली-2020 बनाई गई है। इसी नियमावली के तहत दावा अभिकरणों का गठन किया गया है। इनमें से लखनऊ अभिकरण के तहत बस्ती जिले के दावों का निस्तारण किया जाएगा। दावा अभिकरण को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी और वह उसी रूप में काम करेगा। अभिकरण के निर्णय को न मानने पर तहसील से आरोपियों के खिलाफ वसूली आरसी जारी होगी। कुर्क अमीन संबंधित की संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई कराते हैं। इसके बाद नीलामी कराकर वसूली की जाएगी।
ऐसे काम करेगा अभिकरण
सरकार ने राजनीतिक जुलूसों, विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए संपत्ति क्षति दावा अधिकरण का गठन किया है। इस अधिकरण में वे लोग क्लेम कर सकेंगे, जिनकी संपत्ति को दंगे या किसी जुलूस के दौरान नुकसान पहुंचा हो। अधिकरण उनकी शिकायतों पर वसूली कराएगा। उपद्रवियों को बेगुनाही का सबूत भी अभिकरण में ही देना होगा।
दूरगामी फायदा होगा: एसपी
एसपी हेमराज मीणा के मुताबिक प्राधिकरण गठित करने का दूरगामी फायदा होगा। तोड़फोड़ करने की फितरत पर रोक लगेगी। फिलहाल कबीर हत्याकांड के उपद्रवियों से क्षतिपूर्ति की पहल की गई है। बाकी प्रकरणों में इस तरह के और लोग चिह्नित किए जाएंगे। सीसीटीवी फुटेज और समाचार पत्रों में प्रकाशित फोटोग्राफ की भी मदद ली जाएगी।