बिस्तर पर पड़े कलवारी क्षेत्र छरदही निवासी जहरखुरानी के शिकार बद्री विशाल दुबे।
प्राइवेट स्कूल में कार्यरत कर्मचारी का वेतन से परिवार चलाना कितना मुश्किल है, यह जानना हो तो छरदही केे गंगाराम दुुबे से पूछिए। उस पर यदि परिवार के कमाऊ बेटेे को लकवा मार जाए और उसके इलाज का भी बोझ सिर पर हो तो...? कोई भी इंसान टूटकर बिखर जाएगा।
15 जून को दिल्ली से घर आ रहे बद्री विशाल से बभनान के पास ट्रेन में जहरखुरानों ने कोई केमिकल सुंघाकर लूटपाट की और उसेे ट्रेन सेे नीचे फेंक दिया। सहयात्री लालगंज थाना क्षेत्र के बैरवा गांव के योगेंद्र ने किसी तरह प्राथमिक उपचार कराने के बाद घर पंहुचाया। घर पहुंचने पर हाथ पैर काम करना बंद कर दिया। परिवार में हाहाकार मच गया। परिजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा से रेफर होकर मेडिकल कालेज गोरखपुर ले गए। मगर इलाज में रुपये की कमी आड़े आ गई। 26 जून को वापस घर ले जाना पड़ा। तब से इधर-उधर कर्ज जुटाकर दवा करा रहे हैं। लेकिन बार-बार तारतम्य टूटने से दवा का असर कम होने लगा है। जबकि डॉक्टर लंबा इलाज चलने को बता रहे हैं। जबकि घर में अब खाने तक को नहीं बचा है। परिवार के लोग कहते हैं कि अब मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री राहत कोष से मदद मिलेे तभी जान बचेगी।
बद्री विशाल उर्फ राम सागर दुबेे (21) के पिता गंगाराम दुबे प्राइवेट स्कूल में कार्यरत हैं। जहां उन्हें मामूली वेतन मिलता है। खेती न के बराबर है, जबकि परिवार में सदस्यों की संख्या छह है। बद्री की माता सरोज देवी के अलावा घर में बहन अंजलि है जो बीए में पढ़ रही है। दूसरी बहन रंजना, प्रेम सागर और सबसे छोटी संध्या भी शिक्षारत है।