अंधता निवारण : टुकड़ों में बांट दिए एनएचएम के काम, साल भर नहीं निकला टेंडर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कार्य बिना टेंडर के आवंटित कर दिए गए। कार्रवाई से बचने के लिए इन कार्यों को टुकड़ों में बांटे गए। सूत्रों के अनुसार, जौनपुर की फर्म से चश्मा तो सुल्तानपुर की एक फर्म से सर्जिकल सामग्रियों की आपूर्ति अलग-अलग तिथियों में आदेश कर पांच लाख की सीमा के अंदर कराई गईं। खबर है कि अंधता निवारण मद में उपलब्ध 25 लाख रुपयेे के बजट को खपाने की तैयारी शुरू हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के भारी-भरकम बजट कोे बगैर टेंडर प्रक्रिया अपनाए ही खर्च किए जा रहे हैं। इसकोे लेकर सवाल उठ रहे हैं। साल भर अंदरखाने में हुए इस खेल की कलई खुलने लगी तो विभाग में हड़कंप मच गया। आरोप है कि अंधता निवारण के लिए 25 लाख रुपये का बजट उपलब्ध होने के बाद भी चश्मा, लेंस आदि की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
जानकारों के अनुसार, इस धनराशि को टुकड़ों में बांटकर जौनपुर की एक फर्म को पांच लाख रुपये की सीमा में अलग-अलग तिथियों में आपूर्ति का आदेश जारी कर दिया गया। जबकि इसके पहले स्थानीय फर्मों से ही चश्मा, लेंस आदि की आपूर्ति ली जाती रही है। कुछ ठेकेदारों का आरोप हैं कि एक विभागीय अफसर के चहेते होने के कारण चश्मों की आपूर्ति गैर जनपद के फर्म को दी गई हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने की ओर है तो अब यह बजट खपाने की तैयारी भी शुरू हो गई हैं।
वर्ष 2024- 25 में एनएचएम के बजट से सर्जिकल सामग्रियों की आपूर्ति भी सुल्तानपुर की एक फर्म से ली जा रही है। इसमें भी टेंडर से बचने के बजट को टुकड़ों में बांटकर आदेश किया गया है। खबर है कि 50 लाख रुपये से अधिक की सर्जिकल सामग्रियों की आपूर्ति टुकड़ों में बिना टेंडर के कराया गया है। अब इसके भुगतान की तैयारी चल रही है। इसी तरह बिना टेंडर के ही सेनेट्री नैपकिन की भी आपूर्ति चुपगुप में करा ली गई है।
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प्रिंटिंग मद में 50 लाख का हुआ भुगतान
स्वास्थ्य विभाग के एक ठेकेदार ने डीएम से शिकायत की है कि 10 माह पहले जेम पोर्टल पर निकाले गए प्रिंटिंग के 50 लाख रुपये के टेंडर को आठ माह बाद खोला गया। रातोंरात निविदा आवंटित हुई और आपूर्ति के साथ भुगतान कर दिया है। संबंधित ठेकेदार ने गोेलमाल का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। कहा कि जेम पोर्टल पर निकाले गए टेंडर के लिए एक ही शख्स के आठ अलग- अलग फर्म के नाम आवेदन प्राप्त हुए। 90 दिन के भीतर निविदा आवंटित होने की मियाद होती है। मगर, यह आठ माह बाद खोला गया। इसमें अधिकारियों से लेकर संबंधित पटल के बाबुओं की भूमिका संदिग्ध है।
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कप्तानगंज के विधायक ने सदन में उठाया मामला
सीएमओ कार्यालय में बिना टेंडर के कार्यों के आवंटन के मामलेे में कप्तानगंज के सपा विधायक कवींद्र चौधरी भी कूद पड़े हैैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की इस मनमानी पर सदन में सवाल उठाया। इसके बाद शासन स्तर से सीएमओ से एनएचएम समेत सभी योजनाओं में आवंटित कार्यों, किए गए भुगतान एवं संबंधित फर्मों का विवरण तलब किया गया है। इसी के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति हैं।
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कोट
एनएचएम के तहत चश्मा एवं अन्य सामग्रियों की आपूर्ति नियमानुसार जेम पोर्टल से कराई गई हैं। जरूरत के हिसाब से आपूर्ति इसलिए कराई जाती है कि सामग्रियों का सदुपयोग किया जा सके। इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ