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Basti News: पांच करोड़ गबन मामले की जांच शुरू... प्रोवेशन कार्यालय में मचा हड़कंप

Sun, 17 Mar 2024 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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पिछले दो साल के भीतर सामग्री एवं खाद्यान्न आपूर्ति में हुआ था लंबा गोलमाल
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तत्कालीन डीएम के निर्देश पर पूर्व में हुई जांच में जिम्मेदारों ने की थी लीपापोती
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला प्रोवेशन अधिकारी कार्यालय में पिछले दो साल के दौरान पांच करोड़ के गबन के मामले की जांच दोबारा शुरू हो गई है। इससे विभाग में हड़कंप मच गया है। वर्ष 2021, 22 और 2023 में सामग्री एवं खाद्यान्न आपूर्ति, कार्यालय रखरखाव के मद में पानी की तरह धन खर्च किए गए हैं। कुछ चहेते फर्मों को वास्तविक लागत से दो से चार गुना अधिक धन का भुगतान कर राजस्व को बड़े पैमाने पर चूना लगाने का आरोप है। यह मामला पहले भी सुर्खियों आ चुका है। तब जांच में लीपापोती कर प्रकरण शांत कर दिया गया था। अब शासन ने इस मामले में नए सिरे से जांच बैठा दी है।
आरोप है कि वर्ष 2021, 22 और 2023 में तत्कालीन डीपीओ के स्तर से कार्यालय रखरखाव, बाल सरंक्षण गृह में सामग्री एवं खाद्यान्न आपूर्ति के मद में बेहिसाब धन खर्च किए गए। पहला खेल कार्यालय के वातानुकूलित कक्ष की साज-सज्जा और संसाधनों की आपूर्ति अथवा मरम्मत के नाम पर हुआ। एसी, कंप्यूटर आदि उपकरणों की मरम्मत और खरीदारी के बहाने किस्तों में दस लाख से अधिक रुपये का भुगतान कर दिया गया।
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इस कार्यालय के अधीन संचालित बाल संरक्षण गृह के अपचारियों के भरण पोषण में उपयुक्त होने वाली आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति में भी बड़े पैमाने पर गोलमाल का आरोप है। 25 लाख रुपये का भुगतान एक ही परिवार के चार फर्मों के नाम कर दी गई। इसके अलावा गोपनीय ढंग से अन्य फर्मों के नाम भी भुगतान किए गए हैं। शुरू में जब प्रकरण की पोल खुली तो तत्कालीन डीएम ने जांच शुरू करा दी।
अंदरखाने की रिपोर्ट के अनुसार जांच में दोष प्रतीत होने के बावजूद पूरा ठीकरा सामग्री आपूर्ति करने वाली एक एजेंसी पर फोड़ दिया गया। संबंधित एजेंसी से रिकवरी कराने का निर्देश देकर विभागीय जिम्मेदारों को बचा लिया गया था। पूर्व में हुई जांच के दौरान तत्कालीन डीपीओ अपने पद पर बनी रहीं। अब जब शासन ने दोबारा मामले की जांच शुरू कराई है तो उनकी तैनाती अन्यत्र है। ऐसे में गबन का जिन्न बोतल से दोबारा बाहर आने पर जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया है।
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पहली बार तत्कालीन सीआरओ ने की थी जांच
तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी के खिलाफ सरकारी धन के गोलमाल की पहली शिकायत राम ललन यादव ने की थी। प्रकरण की जांच 2023 में सीआरओ नीता यादव से कराई गई। इसमें पुष्टि हुई कि एसी की मरम्मत कार्य में 45 हजार, नई एसी खरीदने के लिए 85 हजार, कंप्यूटर प्रिंटर की खरीद 49 हजार रुपये में की गई है। यहां वास्तविक लागत से अधिक पाई गई। इसके अलावा वन स्टॉप सेंटर में सामग्रियों की आपूर्ति के लिए एक ही परिवार के चार फर्मों के नाम 25 लाख का भुगतान होना पाया गया। खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति में भी गोलमाल किए जाने की पुष्टि हुई। जनवरी 2021 में आलू 48 रुपये प्रति किलोग्राम तो प्याज 58 रुपये में खरीदा गया। सरसों तेल 250 रुपये प्रति लीटर तो रिफाइंड आयल की आपूर्ति 200 रुपये प्रति लीटर कराई गई। अन्य सामग्रियों की आपूर्ति में भी हर माह सरकारी धन का गोलमाल होता रहा। जांच के दौरान जेम पोर्टल पर कंप्यूटर प्रिंटर की कीमत मात्र 18 हजार रुपये पाई गई। बताते है कि तत्कालीन डीपीओ के प्रभाव के चलते जांच में गबन की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई बदल गई थी। तत्कालीन सीआरओ ने प्रथम दृष्टया गबन किए जाने की पुष्टि करते हुए जिम्मेदार डीपीओ को आरोपित करने के बजाय आपूर्तिकर्ता एजेंसी कर्मचारी कल्याण निगम से रिकबरी की संस्तुति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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शासन ने मामले का लिया संज्ञान
यह प्रकरण का पटाक्षेप फिलहाल साल भर पहले हो गया था। मगर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा शांत नहीं होने दिया। एमएलसी के प्रतिनिधि हरीश ने गबन के प्रकरण और जांच में लीपापोती किए जाने की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। माना जा रहा है कि शिकायत के आधार पर शासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। डीएम से मामले की नए सिरे से जांच कराने को कहा गया है।
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कोट
जिला प्रोवेशन कार्यालय में पिछले तीन साल के भीतर किए गए खर्च के प्रकरण में शासन ने जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच शुरू करा दी गई है। जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा उसके विरुद्ध शासन में रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।
-अंद्रा वामसी, डीएम
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