आउट सोर्सिंग कंपनी को क्लीन चिट, ठगे गए अभ्यर्थी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती में गोलमाल का मामला शासन ने ठंडे बस्ते में डाल कर आउट सोर्सिंग कंपनी को क्लीन चिट दे दी है। इस कार्रवाई में वे अभ्यर्थी ठगा महसूस कर रहे हैं, जिनसे पंजीकरण के नाम पर 590 रुपये वसूला गया। यही नहीं 140 अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी ग्रहण लग गया।
जिले में नव स्थापित मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती शासन आउट सोर्सिंग के माध्यम से कराने की हरी झंडी दी। एक आउट सोर्सिंग कंपनी तय कर दी गई और उसने राजधानी में बैठकर पंजीकरण के लिए 590 रुपये अभ्यर्थियों से मांगे। इसके बाद भर्ती के लिए इंतजार में बैठे तमाम बेरोजगारों ने 590 रुपये देकर पंजीकरण करा लिया। वहीं से 140 लोगों की सूची जारी कर दी गई, मगर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. नवनीत कुमार ने इसे मानने से इंकार दिया। जब कंपनी पर दबाव बढ़ा तो उसने कुछेक लोगों को कॉलेज में भेज दिया और साक्षात्कार की औपचारिकता निभाई। इसे भी मानने से प्रधानाचार्य ने इस नाते इंकार कर दिया। इसी बीच एक और मामले ने तूल पकड़ा। यह मामला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। जिले के माननीयों का नाम भर्ती के लिए सिफारिश में उछला। विधायक कप्तानगंज सीए सीपी शुक्ल ने इस मामले को लोक लेखा समिति में भी उठाया। मामला बढ़ा तो शासन ने संज्ञान लिया।
प्रधानाचार्य ने मामले में पत्र लिखकर आउट सोर्सिंग कंपनी पर कार्रवाई के लिए लिखा। जिस पर डीजी हेल्थ ने भी मुहर लगाई, मगर तमाम उहापोह के बाद शासन ने सभी भर्ती निरस्त करते हुए इसी आउट सोर्सिंग कंपनी को फिर से भर्ती की जिम्मेदारी दे दी। शासन की यह कार्रवाई चर्चा का विषय है। क्योंकि, कंपनी ने पंजीकरण के नाम पर तकरीबन 95 लाख रुपये बटोरे, शासन ने इस धन के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा 140 अभ्यर्थियों से भी वसूली की शिकायत की गई थी उस पर भी शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रधानाचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि शासन ने जो भी निर्णय लिया है उस अनुसार आउट सोर्सिंग कंपनी यहां भर्ती जरूर करेगी। मगर प्रत्येक पद पर उसे तीन अभ्यर्थी की सूची देनी है। उनका साक्षात्कार करने के बाद ही यदि वे पात्र पाए जाएंगे तो भी उन्हें रखा जाएगा।