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Basti News: पुराने 52 उद्यमों का विस्तार, 14 नए उद्यमियों को जमीन का इंतजार

Fri, 17 Mar 2023 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में उद्योग विभाग ने कराए थे 880 करोड़ के 66 उद्यमियों के अनुबंध
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- केवल एक उद्यमी ने खरीद ली स्वयं की जमीन, पांच की उम्मीद लगाए बैठा है महकमा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में जिले में करीब 200 उद्यमियों ने अलग-अलग यूनिट लगाने के लिए सहमति पत्र दिया था। इनका अनुबंध भी हुआ, मगर अभी जिले में एक भी यूनिट नहीं लग सकी है। इन 200 उद्यमियों में 66 का अनुबंध उद्योग विभाग ने कराया है। इनमें 52 तो पुराने उद्यम हैं, जिनका विस्तारीकरण होगा, जबकि 14 नए उद्यम के लिए उद्यमियों ने जमीन की मांग की थी, जिसे अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।
हालांकि उपायुक्त उद्योग हरेंद्र प्रताप ने कहा कि नए उद्यमी जहां जमीन चाह रहे हैं, वहां तो कोई जमीन विभाग के पास नहीं है, मगर मिनी औद्योगिक स्थान में जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। उद्योग विभाग ने फरवरी में ग्लोबल समिट का जिला स्तर पर आयोजन कराया। यहां बड़े पैमाने पर प्रशासन ने अनुबंध कराए। विभिन्न क्षेत्र में 200 उद्यमियों ने 4880 करोड़ के अनुबंध किए। इसमें उद्योग विभाग की ओर से कराए गए अनुबंध को लेकर विभाग तैयारी में जुटा है।
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एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, मगर अब तक केवल एक डिस्टलरी उद्योग जो करीब 350 करोड़ की लागत का है, ने उद्योग स्थापना की नींव डाली है। उसने स्वयं की 25 एकड़ जमीन खरीदी है और उस पर काम भी शुरू हो गया है। शेष उद्यम अभी एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा सके हैं। विभाग के अनुसार तो एक माह के भीतर डिस्टलरी सहित पांच उद्यम के संचालन की उम्मीद जाग गई है, मगर अभी उन पर काम चल रहा है।

14 नए उद्यमियों को जमीन की दरकार
सरकार की समिट में शामिल जिले के आदित्य कुमार, सुनील कुमार गुप्ता सहित 14 उद्यमियों को जमीन की दरकार है। इनमें आदित्य पीवीसी पाइप की फैक्ट्री लगाएंरे, जबकि सुनील कुमार राइस से जुड़े प्रोडक्शन आफ ब्रूम्स की फैक्ट्री डालेंगे। इन दोनों के अलावा 12 भी अलग-अलग फैक्ट्री डालने का अनुबंध किए हुए हैं। करीब 100 करोड़ के अनुबंध वाले इन उद्यमियों के जमीन की जरूरत है, जिसे पूरा कर पाने में विभाग खुद को अक्षम पा रहा है।
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ये हैं जनपद के आठ मिनी औद्योगिक स्थान
उद्योग विभाग के अधीन जिले में आठ मिनी औद्योगिक स्थान हैं। साढ़े तीन दशक बीत गए, अभी इन स्थलों पर औद्योगिक इकाइयां स्थापित नहीं हो पाई हैं। गनेशपुर-सदर, भदावल-हर्रैया, पांऊ-कुदरहा, राजाजोत कला-कप्तानगंज, बोदवल-बनकटी, रेहार जंगल-सल्टौआ, धोबहिया-गौर, परसोहिया-रामनगर शामिल हैं। यहां इकाई लगाने के लिए बीच-बीच में भूखंड का आवंटन होता रहा, लेकिन उद्योग न लगाने पर जिला उद्योग बंधु समिति ने पूर्व में ही आवंटन निरस्त कर दिया। वर्तमान में सभी मिनी औद्योगिक स्थान खाली हैं।

आठ मिनी औद्योगिक स्थान में करीब दो सौ प्लाट हैं, मगर यहां मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण इनका विकास नहीं हो सका है। सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया है। इसी भूखंड में से जमीन मांगने वाले उद्यमियों को प्लाट आवंटित कर दिया जाएगा।
-हरेंद्र प्रताप, उपायुक्त उद्योग
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2018 इंवेस्टर्स समिट में हुए थे पांच अनुबंध
जिले में 2018 के इंवेस्टर्स समिट में उद्योग विभाग ने प्रशासन के सहयोग से पांच अनुबंध किए थे। यह पांचों उद्यम आज भी संचालित हैं। इनमें एक फ्लोर मिल, एक पेपर प्रोडेक्ट, एक आईस कैंडी मिल, एक खाद्यान्न गोदाम तथा एक राइस मिल का करीब 200 करोड़ अनुबंध हुआ था, जो वर्तमान में भी संचालित है।
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उद्योग विभाग से कंपनी को ऐसी जमीन चाहिए जो शहर से सटा हो, और वहां मूलभूत सुविधाएं हों या फिर उसकी व्यवस्था आसानी से हो जाए। अनुबंध के अनुसार लीज पर निशुल्क जमीन कंपनी को चाहिए।
-सुनील कुमार गुप्ता, उद्यमी

जमीन की मांग औद्योगिक क्षेत्र में की थी। कुछ स्थान विभाग की ओर से सुझाए गए हैं। अभी उसे देखा नहीं है। जमीन मिलने के बाद उद्यम की स्थापना की जाएगी।

-आदित्य, उद्यमी
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