अधिकतर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं हुए छिड़काव एवं अन्य बचाव कार्य
पानी लगने से जलजनित बीमारियों का बढ़ सकता है प्रकोप, महकमा अलर्ट नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बारिश की वजह से शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह जलभराव हो गया। ऐसे में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिले में पहले से ही संक्रामक बीमारियों ने पांव पसार रखा है। जेई/एईएस के पांच से अधिक मरीज अगस्त-सितंबर माह में मिल चुके हैं। इसके अलावा 21 मरीज डेंगू के हैं। इधर बारिश होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के पास कुछ विशेष तैयारी नहीं है।
जुलाई में चलाया गया संचारी रोग नियंत्रण अभियान फीका पड़ गया। कागज में भले ही सौ प्रतिशत बचाव कार्य हुए हैं। मगर, पूरे अभियान के दौरान धरातल पर कुछ नहीं दिखा। जुलाई और अगस्त में जमकर बारिश भी हुई। इसके बाद जलजनित बीमारियों को प्रकोप बढ़ने लगा। 15 अगस्त के बाद से हाईग्रेड फीवर के मरीज अस्पताल में बढ़ने लगे। जांच के दौरान जेई/एईएस से संक्रमित होने की पुष्टि होने लगी।
अलग-अलग गांवों पांच से अधिक मरीज पाए गए। इसके बाद संबंधित गांवों में एंटी लार्वा छिड़काव, सफाई एवं दवा वितरण का कार्य हुआ। इधर एक पखवाड़े के भीतर डेंगू का प्रकोप बढ़ने लगा है। हर्रैया क्षेत्र के केशवपुर गांव में आठ डेंगू के मरीज मिले। वहीं जिले भर में 21 डेंगू के मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। यह स्वास्थ्य विभाग के रिकाॅर्ड में दर्ज है।
इसके अलावा भी डेंगू के मरीज पाए गए हैं, जिनका इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है। उम्मीद थी कि अब जलजनित बीमारियाें पर रोक लग जाएगी। मगर, मानसून ने फिर से दस्तक दे दी है। दो दिनों तक हुई मूसलधार बारिश से गांव-शहर चौतरफा पानी भर गया है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा।
शहर के पुरानी बस्ती क्षेत्र के चाईबारी टोले में गंदगी के बीच पानी पसरा हुआ है। यह मोहल्ला संक्रामक बीमारियों के लिए पहले से संवेदनशील है। यहां फॉगिंग, छिड़काव जैसे कोई बचाव कार्य नहीं हुए हैं। इसके अलावा पिकौरा शिवगुलाम, पिकौरा दत्तूराय, माली टोला, सब्जी मंडी गांधीनगर, दक्षिण दरवाजा, मुरलीजोत आंशिक आदि मोहल्लों में भी गंदगी और जलभराव जगह-जगह है।
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केवल आठ बेड का बनाया गया वार्ड
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए केवल आठ बेड का वार्ड बनाया गया है। यहां गंभीर मरीजों के लिए प्लेटलेट की व्यवस्था नहीं है। कमोवेश यही हाल ओपेक चिकित्सालय कैली में भी है। डेंगू के मरीज भर्ती करने की व्यवस्था बनाई गई है। मगर, प्लेटलेट बाहर से खरीदकर लाने को कहा जा रहा है।
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बीमारियों से बचने के लिए बरतें एहतियात : डॉ. रजत
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. रजत पांडेय ने कहा कि इस सीजन में एहतियात बरतने से ही बीमारियों से बचा जा सकता है। जलजनित बीमारियों से बचने की जरूरत है। घरों के आसपास पानी न एकत्र होने दें। सोते समय खिड़की, दरवाजे बंद कर लें। इसके अलावा सूखा कपड़ा ही पहनें। खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खुले में बिकने वाला खाद्य सामग्री का सेवन कतई न करें। घर में पानी उबालकर पीएं। गर्म एवं ताजा भोजन करें। सब्जियों को अच्छी तरह से धोने के बाद उबालकर या पकाकर ही खाएं। इस सीजन में मांस का सेवन कम करना चाहिए।
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कोट
जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। जिला अस्पताल से लेकर सभी सीएचसी-पीएचसी पर दवाएं और जांच की सुविधा उपलब्ध है। मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो रहा है। संवेदनशील गांवों में टीम भी भेजी जा रही है।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ