जिले में प्रतिदिन ऑनलाइन किए जा रहे एक हजार से अधिक आवेदन, रिपोर्ट लगने में हो रही देरी
तहसील का चक्कर काट रहे आवेदक, नहीं मिल रहे लेखपाल, लगातार पैरवी के बाद लग रही रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आजकल लेखपालों पर काम का बोझ बढ़ गया है। ई-खसरा पड़ताल और क्राॅप कटिंग से लेकर पोलिंग बूथ तक की जिम्मेदारी एक साथ संभालनी पड़ रही है। इस चक्कर में लेखपालों के अधीन निस्तारित किए जाने वाले परंपरागत कार्य बाधित हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र जारी करने के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सामान्य दिनों में सप्ताह भर के भीतर जारी होने वाले यह प्रमाणपत्र अब 15 दिन से एक महीने तक नहीं बन पा रहे हैं। फरियादियों काे तहसील का रोजाना चक्कर लगना पड़ रहा है।
जिले में बस्ती सदर, हर्रैया, भानपुर एवं रुधौली तहसील है। यहां तैनात लेखपालों की संख्या करीब 505 है। जबकि चारों तहसीलों में लेखपालों की सृजित पदों की संख्या 848 है। ऐसे में कार्यरत लेखपालों पर कार्य का बोझ पहले से बढ़ा हुआ है। अधिकतर लेखपाल मूल तैनाती के अलावा अन्य हल्कों का भी चार्ज अतिरिक्त रूप से संभाल रहे हैं। जबकि एक दर्जन लेखपाल कानूनगो का पदभार अतिरिक्त रूप से संभाल रहे हैं। इनके पास सामान्य दिनों में भी एक साथ दो- दो हल्के का कार्य होता है।
इधर कार्य का बोझ और बढ़ गया है। लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत बूथ प्रबंधन में लेखपालों की भूमिका अहम की गई है। इसके अलावा लेखपालों के लिए ई-खसरा पड़ताल पूर्ण कर ऑनलाइन अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। एक महीने में 1430 जायद फसल की पड़ताल पूरी हो पाई है। इन दिनों 1431 खरीफ एवं रबी फसल की पड़ताल की जा रही है। उच्चाधिकारियों का दबाव है कि इसे भी पखवाड़े भीतर पूरा करना है।
इसके अलावा क्रॉप कटिंग कर पैदावार का औसत ऑनलाइन फीड करना है। खतौनी में अंश निर्धारण के कार्य का जिम्मा अलग से निभाना है। यह तीनों कार्य शासन की प्राथमिकता में है। ऐसे में लेखपाल इन कार्यों को निपटाने के चक्कर में मूल कार्य से भटक गए हैं। इससे आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र तक समय भीतर बनना मुश्किल हो गया है। राजस्व मुकदमों के निस्तारण में अपेक्षित रिपोर्ट, जमीन की पैमाइश, पत्थर नसब, धारा 80 की रिपोर्ट भी नहीं लग पा रही है। इनसे जुड़े फरियादियों को तहसीलों का चक्कर काटना पड़ रहा है। कुछ रसूखदार लोगों के कार्य मुश्किल से हो पा रहे हैं।
आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र के लिए प्रतिदिन औसतन एक हजार से अधिक ऑनलाइन आवेदन हो रहे हैं। नए शैक्षिक सत्र में प्रवेश शुरू होने के कारण इसकी डिमांड बढ़ गई है। अमूमन एक सप्ताह के भीतर यह प्रमाणपत्र जारी हो जाने चाहिए। मगर, लेखपालों के पास इन आवेदनों पर नजर फेरने भर की फुर्सत नहीं है। इससे रिपोर्ट लगने में ही 15 दिन से अधिक का समय लग जा रहा है। समय से प्रमाणपत्र न मिलने से आवेदक निराश हो रहे हैं।
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चारों तहसीलों में 6500 आवेदन लंबित
चारों तहसीलों में आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र के आवेदनों की लंबी फेहरिस्त है। बस्ती सदर तहलील में 1900 आवेदन लंबित है। हर्रैया में 1800, भानपुर में 1500 और रुधौली में 1300 आवेदन लंबित है। यह सभी आवेदन लेखपाल स्तर पर रिपोर्ट न लग पाने के कारण ऑनलाइन अग्रसारित नहीं हो पा रहे हैं।
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ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी होना चुनौती पूर्ण
तहसीलों से ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी हो पाना कठिन हो गया है। इसके लिए ऑफलाइन होने वाले आवेदन तहसीलों में धूल फांक रहे हैं। तहसीलों में इसका कोई डाटा भी नहीं है। जबकि इस प्रमाणपत्र पर सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को नौकरी एवं नामांकन में दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ अनुमन्य है। इसीलिए इस प्रमाणपत्र के लिए आवेदन भी प्रतिदिन किए जा रहे हैं। मगर, इस पर रिपोर्ट नहीं लग पा रही है। इसमें स्थलीय जांच कर रिपोर्ट लगाना अनिवार्य है। शासनादेश के अनुसार 8 लाख सालाना आय और 900 स्क्वायर फिट क्षेत्रफल में आवास बनाकर रहने वाले लोग ही ईडब्ल्यूएस के वास्तविक पात्र है।
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जानिए, लेखपालों का दर्द- नहीं चल रही साइट
विभागीय कार्यों का दायित्व न निभा पाने को लेकर लेखपालों का अपना दर्द है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लेखपालों ने बताया कि शासन की प्राथमिकता वाले सर्वे कार्यों को लेकर दिन-रात उलझना पड़ रहा है। दिन में क्षेत्र में रहकर भौतिक मूल्यांकन कर रहे हैं। रात में इसकी ऑनलाइन फीडिंग करा रहे हैं। कभी- कभी रात भर जागना पड़ रहा रहा है। विभागीय साइट भी चल नहीं रही है। सर्वर डाउन होने से ऑनलाइन कार्यों को निपटाने में समय अधिक लग रहा है। इस चक्कर में आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र भी लंबित रह जा रहे हैं। उधर उच्चाधिकारियों का दबाव है सबकुछ ऑनलाइन अपडेट होना चाहिए। मगर दुश्वारियों को समझने वाला कोई नहीं है।
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कोट
जिले में 343 लेखपालों की कमी है। इधर भर्ती हुई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण तैनाती नहीं हो पाई है। जहां तक साइट न चलने की बात है तो यह समस्या स्थानीय स्तर से नहीं है। फिर भी सभी कार्य तेजी के साथ निपटाए जा रहे हैं।
-संजीव ओझा, सीआरओ, बस्ती