मिनी पीजीआई के रूप में विख्यात ओपेक चिकित्सालय कैली में रोगों का निदान विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते मुश्किल में है। डॉक्टरोंकी कमी के चलते जहां शुरूआती दौर से ही हृदय रोग विभाग पर ताला लटका रहा वहीं दंत व स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग भी बंद है। अब सर्जरी पर संकट गहराने लगा है। क्योंकि यहां तीन पद के सापेक्ष एक भी सर्जन नहीं हैं, ऐेसे में इस चिकित्सालय में ऑपरेशन भी असंभव हो जाएगा।
करोड़ों की जमीन पर अस्पताल का निर्माण वर्ष 1997 में पूरा हो गया। इसकी शुरुआत भी तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने आनन-फानन कर दी। 500 शैय्या इस अस्पताल की शुरुआत ही खराब हुई। तब छिटपुट डॉक्टरों के भरोसे इसे शुरू कर दिया गया और जैसे-जैसे समय बीता इसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। वर्तमान में यहां प्रशासनिक और अन्य भवन में वाह्य चिकित्सा कक्ष चलाया जा रहा है। यही नहीं डॉक्टरों की कमी के चलते यहां मरीजों की संख्या भी दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है।
ये हैं सृजित पद और तैनाती
चिकित्सालय में फिजीशियन के तीन पद के सापेक्ष मात्र एक की तैनाती है। इसके अलावा चेस्ट फिजीशियन का भी इन्हीं से काम चलाया जा रहा है। चेस्ट फिजीशियन का पद रिक्त चल रहा है। इसके अलावा अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, पैथालॉजिस्ट, कॉर्डियोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट के सभी पद रिक्त चल रहे हैं। यहां 43 डॉक्टरों के पद के सापेक्ष 21 खाली हैं। यही नहीं प्रशासनिक अधिकारियों को भी प्रभार के भरोसे संचालित किया जा रहा है।
शासन के संज्ञान में सब कुछ
ओपेक चिकित्सालय कैली के निदेशक डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि शासन के संज्ञान में रिक्त पदों की सूचना है। यह सही है कि सर्जन के बगैर किसी तरह ऑपरेशन का कार्य संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा जहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, उन विभागों को बंद किया जा चुका है।