बस्ती। सात साल पहले जिस उद्देश्य से बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) का गठन हुआ, वह अभी तक सार्थक सिद्ध होता नहीं दिख रहा है। दो बार नियोजित शहर का खाका तैयार हुआ, लेकिन अनियोजित निर्माण पर रोक नहीं लग सकी। इस अवधि में शहर का विस्तार भी तेजी से हुआ। न तो ग्रीन जोन सुरक्षित किए जा सके और न ही मानक के मुताबिक चौड़े रास्ते संरक्षित हुए हैं। शहरी क्षेत्र में अवैध कालोनियों का निर्माण जारी है। नगर पालिका क्षेत्र के बाहर तेजी के साथ आबादी का अनियमित स्वरूप बढ़ता जा रहा है। बीडीए की कवायद सिर्फ जुर्माने के रूप में राजस्व बढ़ाने और नक्शा बनाने तक ही सीमित है।
बीडीए के पहले यहां विनियमित क्षेत्र (आरबीओ) लागू था, जिसके दायरे में नगर पालिका समेत शहर के इर्द-गिर्द के 69 गांव शामिल रहे। वर्ष 2015 में विकास प्राधिकरण लागू होने की कवायद शुरू हुई तो आनन-फानन में इन्हीं 69 गांवों का मास्टर प्लान तैयार कर दिया गया। 28 अक्तूबर-2016 में आरबीओ का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। 51 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में रचे बसे 69 गांवों में विकास प्राधिकरण लागू कर दिया गया। इसमें 69.54 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है। बीडीए के मुताबिक ग्रीन जोन में निर्माण प्रतिबंधित है। मगर ग्रीन जोन वाले भूभाग में धड़ाधड़ निर्माण होते गए। रास्तों का भी मानक पूरा नहीं हुआ।
यूं कहें कि बीडीए के प्रभावी होते ही विस्तार क्षेत्र में अवैध कालोनियों का तेजी से निर्माण होने लगा। जहां धरपकड़ हो रही है वहां नियोजन के मानकों का पालन कराने के बजाय चढ़ावा चढ़ाने एवं जुर्माने के साथ नक्शा बनवाने का ही खेल चल रहा है। इधर महायोजना 2021 में बीडीए का दायरा बढ़कर 217 गांवों तक पहुंच गया। लेकिन इनका मास्टर प्लान महायोजना 2031 में तैयार किया गया है। जिसे शासन ने अभी स्वीकृति नहीं दी है। कुल मिलाकर बीडीए विनयमित क्षेत्र के ही पुराने दायरे तक सीमित है।
मौके चर चिह्नित नहीं हैं ग्रीन जोन
बीडीए के मैप में पुराने मास्टर प्लान में ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित 69.54 हेक्टेयर भूमि का मौके पर चिह्नांकन नहीं हुआ है। लैंड यूज की जमीनों के प्रति भी जागरूकता न के बराबर है। असल में शहरी क्षेत्र के मैप में काश्तकारों की भी जमीन ग्रीन जोन के रूप चिह्नित कर दी जाती है, जिसका मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके संबंधित भूखंड पर निर्माण प्रतिबंधित है, जिससे काश्तकार को यह नहीं मालूम रहता है कि उनका भूखंड ग्रीन जोन में शामिल है। इसके अलावा जलाशय, बाग-बगीचे, चारागाह, बंजर भूमि भी ग्रीन जोन में शामिल है। बीडीए इन्हें भी सुरक्षित कर पाने में सफल नहीं है।
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ढोरिका में बस गई मानक विहीन कालोनियां
शहर से सटे ढोरिका गांव के इर्द-गिर्द जमीन कारोबारियों ने तेजी से पांव पसारा। यहां मानक के विपरीत प्लॉटिंग करके भूखंडों को बेचने का सिलसिला अभी भी जारी है, जिससे अनियमित कालोनियों का स्वरूप तैयार हुआ। कुछ भूखंडों पर बीडीए ने रोक भी लगाई। बाद जुर्माना आदि देकर लाेगों ने नक्शा स्वीकृति करा लिया।
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पटेल चौक, टोल प्लाजा पर भी हुआ नई कालोनियों का विस्तार
पटेल चौक और टोल प्लाजा क्षेत्र के एक दर्जन गांवों ने शहर का रूप अख्तियार कर लिया है। मड़वानगर, मिश्रौलिया, डिड़ौहा, डड़वा, नरहरिया, बरगदवा, बड़ेवन, हरदिया, बसिया आदि गांवों में तेजी के साथ नए भवनों का निर्माण हुआ है। अभी एक दशक पहले तक इन गांवों के बीच लंबा फासला था जो अब नई काॅलोनियों से भर गया है।
बड़ार, ऊंची भीटी में बसने लगी काॅलोनी
हाल में कुआनो नदी के किनारे गैर चिरागी गांव बड़ार और ऊंची भीटी अब आबादी से भरने लगा है। यहां जमीन कारोबारियों ने बाकायदा प्लॉटिंग कर जमीनों का सौंदा कर रहे हैं। पार्क, चौड़े रास्ते के मानक का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे शहर की सूरत बिगड़ती जा रही है।
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यह हैं रास्ते का मानक
शहर के विस्तार वाले क्षेत्रों में मकान का नक्शा पास कराने के लिए नौ मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए। कामर्शियल निर्माण के लिए 12 मीटर चौड़ा रास्ता अनिवार्य है, जबकि निर्मित क्षेत्र में मकान का नक्शा पास कराने के लिए 4 मीटर चौड़ा रास्ता होना चाहिए। अधिकांश जगहों पर इस मानक का पालन नहीं हो रहा है। उप निबंधन कार्यालय में हो रहे शहरी क्षेत्र के बैनामों में खुद इसका प्रमाण मिल रहा है। अधिकांश बैनामा दस्तावेजों में रास्तों के उल्लेख में तीन या चार मीटर चौड़ाई या फिर चकमार्ग ही दर्शाया जा रहा है।
217 गांवों की भूमि अभी कृषि योग्य
महायोजना 2021 में शामिल 217 गांवों का मास्टर प्लान जब तक स्वीकृति नहीं होगा तब यहां की भूमि कृषि योग्य ही मानी जाएगी। इस क्षेत्र में निर्माण पर बीडीए का पूरा हस्तक्षेप होगा। काश्तकारों को कृषि भूमि के केवल 10 प्रतिशत हिस्से पर ही निर्माण की छूट है। इससे अधिक क्षेत्र में निर्माण करने पर बीडीए दखल देगा।
बीडीए, राजस्व और पंजीयन विभाग का तालमेल जरूरी
नियोजित शहर के लिए बीडीए, तहसील और पंजीयन कार्यालय का तालमेल होना सबसे जरूरी है। तीनों विभाग को यह पता होना चाहिए बीडीए का क्षेत्र कहां तक है और ग्रीन जोन एवं ग्रीन बेल्ट में किन जमीनों को चिह्नित किया गया है। बीडीए के नियम से तहसील और पंजीयन कार्यालय अनभिज्ञ रहते हैं। इसलिए निर्माण के लिए प्रतिबंधित जमीनों का बैनामा और खारिज दाखिल दोनों हो रहा है। जिसका खामियाजा बाद में निर्दोष बैनामेदार काे भुगतना पड़ रहा है।
-विजय तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
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अवैध निर्माण पर कार्रवाई लगातार की जा रही है। कुल 1200 लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। ग्रीन जोन या ग्रीन बेल्ट में निर्माण प्रतिबंधित है। नक्शा ही नहीं पास किया जा रहा है। कोई यदि निर्माण करा रहा है तो उसके लिए जवाबदेह संबंधित भूमि स्वामी ही होगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।