मेडिकल कॉलेज : टेक्नीशियनों के समायोजन के बाद मानदेय देने से मना किया वित्त नियंत्रक
वित्तीय संकट के चलते दवाओं की उपलब्धता में भी कमी, मरीज हो रहे प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज का वित्तीय अनुभाग स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में कदमताल नहीं कर रहा है। जरूरी से जरूरी प्रस्ताव पर भी वित्त नियंत्रक का अड़ंगा मामले को उलझा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन और वित्त नियंत्रक में अंदर ही अंदर रस्साकसी तेज हो गई है। वित्तीय पेच के चलते मिनी आईसीयू और मॉड्यूलर ओटी बनकर तैयार होने के बाद भी चालू नहीं हो पा रहा है। इसकी मार मरीजों को झेलनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज को अपग्रेड करने का हर मामला वित्तीय अनुभाग तक पहुंचते-पहुंचते उलझ जा रहा है। इसी वजह से साधारण इलाज से बेहतर यहां कुछ भी नहीं हो पा रहा है। ओपेक चिकित्सालय कैली में ओपीडी के बाहर बने भवन में अत्याधुनिक इलाज की सुविधा बहाल करने की योजना है। अब तक इस भवन में सौ बेड के वार्डों में ऑक्सीजन पाइप लाइन का कार्य बाकी था। इसके अलावा मॉड्यूलर ओटी एवं आईसीयू वार्ड की साज- सज्जा का कार्य कराया जा रहा है।
इस पूरे भवन को वातानुकूलित रखने की भी व्यवस्था बनाई गई है। निर्माण एजेंसी ने लगभग सभी तरह के कार्य पूर्ण कर दिए हैं। छिटपुट बचे कार्य अंतिम चरण में चल रहे हैं। मगर अब जब अत्याधुनिक सुविधाओं के बहाल होने का समय आया तो प्रत्येक पायदान पर वित्त नियंत्रक का पेंच उलझा दिया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन सुविधाओं को बहाल करने के अंतिम दौर में लाचार दिख रहा है।
वातानुकूलित नए भवन में 10 बेड का आईसीयू बनकर लगभग तैयार है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसे चालू करने की योजना बनाई। इसके लिए कोविड में एनएचएम के तहत यहां सेवा दे चुके वेंटिलेटर टेक्नीशियनों के समायोजन की प्रक्रिया पूरी की गई। स्वीकृति के साथ जब फाइल वित्त नियंत्रक के पास पहुंची तो उन्होंने इस पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि इनके मानदेय का कोई पृथक मद नहीं है। इसी के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन के इस पहल पर पानी फिर गया। उधर, समायोजित टेक्नीशियनों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। यह मामला उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। इस मसले पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और वित्त नियंत्रक के बीच सामंजस्य बनाने के लिए उच्चाधिकारियों ने पहल शुरू कर दी है।
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कोट
दस बेड का आईसीयू बनकर लगभग तैयार है। वेंटिलेटर संचालित करने के लिए टेक्नीशियनों के मानदेय का मामला फंसा हुआ है। मॉड्यूलर ओटी में भी कुछ वित्तीय प्रकरण बाधा है। इन सभी मुद्दों पर वित्त नियंत्रक से वार्ता चल रही है। नियमों के दायरे में रहकर शीघ्र कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।
-डॉ. मनोज कुमार, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज