चहेल्लुम सोमवार को अकीतद व गमगीन माहौल में मनाया गया। या हुसैन की सदाओं के साथ शहीदों को अलविदा कहा गया। गांधी नगर में निकाले गए जुलूस में जंजीरों और छुरियों से मातम कर युवाओं ने खुद को लहूलुहान कर लिया।
सोमवार देर रात जिला अस्पताल स्थित कर्बला में जुलूस रिवायती अंदाज में समाप्त हुआ। दुरूदो सलाम के साथ शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया गया। इमामबाड़ा शाबान मंजिल से निकाला गया मातमी जुलूस गांधी नगर होता हुआ स्टेट बैंक के पीछे स्थित इमामबाड़ा लाडली मंजिल पहुंचा। यहां पर एक मजलिस हुई। बाद में जुलूस शुरू होकर कर्बला पहुंचा। प्रतीक के रूप में ताबूत व परचमें हुसैनी अलम साथ-साथ चल रहा था। शाबान मंजिल में आयोजित मजलिस में मौलाना अबुजर ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपने नाना पैगंबरे इस्लाम का दीन बचाने की खातिर शहादत पेश की। पैगंबर के समय में जब उनके चचा हजरत हमजा की शहादत हुई तो पैगंबर ने खुद हजरत हमजा का गम मनाने को कहा था। हम पैगंबर की सुन्नत पर ही अमल करते हुए इमाम हुसैन का गम मनाते है।
उन्होंने कहा कि आज भी आईएस व अलकायदा के रूप में यजीदी विचार धारा जिंदा है जो इस्लाम को बदनाम कर रही है। ऐसे में इमाम की याद मनाकर हम दुनियां को बताने का प्रयास करते है कि पैगंबर के इस्लाम से इन आतंकवादी ताकतों का कोई वास्ता नहीं है। हर हुसैनी का यह कर्तव्य है कि वह जियो और जीने दो की इमाम की विचार धारा को जन-जन तक पहुंचाए। जुलूस में मौलाना अली हसन, मो. रफीक, जर्रार हुसैन, सुहेल हैदर, जीशान रिजवी, फरहत हुसैन, डॉ. बीएच रिजवी, नजफी, शम्स आबिद, जैन, आले हसन, हसन जावेद समेत कई अन्य मौजूद रहे।