वहां के ईशदत्त मिश्र मत्स्य विभाग में निरीक्षक थे। उनकी पत्नी राधिका को गठिया हो गया था। स्थिति यह थी वह अपने व्यक्तिगत कार्य भी बिना किसी के सहारे के नहीं निपटा पाती थीं। पूरी गृहस्थी का बोझ ईशदत्त मिश्र पर आ गया। तीन पुत्रों अशोक, पुष्पेंद्र एवं ज्ञानचंद की परवरिश की जिम्मेदारी भी उन्हीं को उठानी पड़ी।
वह सेवा (नौकरी) से तो रिटायर हुए लेकिन, पत्नी की सेवा से कभी रिटायर नहीं हुए। सुबह ब्रश कराने से लेकर स्नान, बालों में कंघी वह खुशी-खुशी करते रहे। 23 अगस्त को उनकी एक प्राइवेट अस्पताल में मौत हो गई। बुधवार को विधि-विधान से उनका ब्रह्मभोज करने के बाद रात में ईशदत्त मिश्र की तबीयत बिगड़ी और बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में मौत हो गई।