कोपवा, कोपिया सहित अन्य गांवों के काश्तकार अंश निर्धारण में लगा रहे मनमानी का आरोप
बैनामेदार की चौहद्दी को नजरंदाज कर मूल गाटे में कर दिया जा रहा अंश निर्धारण, आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीनों के मुआवजा वितरण में अड़चन आ गई है। गांव-गांव काश्तकारों के अंश निर्धारण का मामला उलझता जा रहा है। इसमें तमाम तरह की आपत्तियां आ रही हैं। इसे सुलझाना फिलहाल आसान नहीं है। इसी वजह से अब तक 300 करोड़ में महज 50 करोड़ रुपये ही मुआवजा वितरित हो सका है। 250 करोड़ रुपये मुआवजा बंटना बाकी है।
सदर तहसील के छितही नरसिंह, कोपवा, कोपिया, बायपोखर समेत आधा दर्जन गांवों में अंश निर्धारण का मामला उलझा हुआ है। काश्तकार जिम्मेदारों पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जिन गाटों में पूर्व में चौहद्दी के साथ बैनामा हुआ है और उनका रकबा रिंग रोड परिक्षेत्र से बाहर है उनका भी अंश निर्धारण कर दिया जा रहा है। दलील देने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं कुछ काश्तकार न्यायालयों में विचाराधीन मुकदमों की वजह से अधिग्रहित क्षेत्र की जमीन के अंश निर्धारण पर आपत्ति कर रहे हैं।
भूमि आधिपत्य कार्यालय में 50 से अधिक आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। जगह-जगह प्रकरण उलझने से मुआवजा वितरण की गति धीमी हो गई है। कार्यदायी संस्था की ओर से 250 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए गए है। बावजूद इसके 50 करोड़ रुपये ही मुआवजा वितरित हो पाया है। स्थानीय स्तर पर काश्तकार लेखपालों पर अंश निर्धारण में मनमानी का आरोप लगा रहे हैं।
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कोपवा के काश्तकारों ने सीएम पोर्टल पर की शिकायत
सदर तहसील के कोपवा गांव के काश्तकारों ने मनमानी की शिकायत डीएम, एसडीएम से लगायत सीएम पोर्टल पर की है। यहां मामले का पटाक्षेप पिछले एक महीने से नहीं हो पा रहा है। काश्तकार भानुप्रताप सिंह, अरुण कुमार सिंह, संजय सिंह, राजेश, आशीर्वाद आदि ने पिछले दिनों लिखित रूप से आरोप लगाया कि नियम संगत अंश निर्धारण में चढ़ावा की मांग की जा रही है। न देने पर काश्तकारों को उलझाया जा रहा है। आरोप यह भी लगाया गया कि संबंधित हल्का लेखपाल की जगह उनके परिजन काश्तकारों की समस्या सुनते हैं। हालांकि, इस मामले में एसडीएम सदर ने हस्तक्षेप किया। लेखपाल को स्वयं ड्यूटी करने की सख्त चेतावनी दी। इसके बाद भी रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीनों का अंश निर्धारण सही ढंग से न किए जाने का आरोप है।
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बैनामेदार का हो रहा गलत अंश निर्धारण
कोपवा गांव में आधा दर्जन बैनामेदारों का गलत ढंग से अंश निर्धारण किए जाने का मामला सामने आया है। इस गांव के गाटा संख्या 21 अ एवं ब का कुल रकबा 2.1160 हेक्टेयर है। इसमें 14 काश्तकारों का अंश है। छह काश्तकार बैनामे के आधार पर इस गाटे पर काबिज है। मूल गाटे में इन बैनामेदारों का अंश निर्धारित कर उन्हें मुआवजा योग्य दर्शाया गया है। मूल खातेदार एवं बैनामेदार दोनों को इस पर एतराज है। इनका कहना है कि बैनामे में जमीन की चौहद्दी लिखी हुई है। इस आधार पर कब्जा है। अधिकतर बैनामेदार की जमीन चौहद्दी के हिसाब से रिंग रोड परिक्षेत्र से बाहर है। बावजूद इसके मूल गाटे में नाम होने की वजह से अधिग्रहित जमीन में उनका अंश निर्धारण किया जा रहा है। इससे बाद में आपस में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि बैनामेदारों ने विशेष भूमि आधिपत्य कार्यालय को इस आशय का शपथ पत्र दिया है कि उनकी बैनामे की जमीन चौहद्दी के हिसाब रिंग रोड परिक्षेत्र से बाहर है। इसलिए उन्हें मुआवजे की सूची में न रखी जाए। बावजूद इसके अभी प्रकरण का पटाक्षेप नहीं किया गया है।
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केस- एक
सदर तहसील के पिपरा मेघऊ के उदय भान ने बताया कि कोपवा गांव में गाटा संख्या 21 अ एवं ब में उनकी बैनामे की जमीन है। इस गाटे में रिंग रोड के लिए अधिग्रहित क्षेत्र से उनकी जमीन बाहर है। बैनामे में दर्ज चौहद्दी में यह स्पष्ट है। उनका कब्जा दखल भी अधिग्रहित क्षेत्र में नहीं है। फिर भी उनका अंश निर्धारण किया गया है। इस आशय का शपथ पत्र विशेष भूमि आधिपत्य कार्यालय को दे दिया है।
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केस- दो
पिपरा मेघऊ के रहने वाले बैनामेदार गंगराम का कहना है कि गाटा संख्या के आधार पर अंश निर्धारण होना चाहिए, लेकिन बंटवारा और बैनामे का ध्यान देना चाहिए। हमने स्टांप शुल्क जमा कर चौहद्दी के साथ बैनामा कराया है। लंबे समय से वहां काबिज भी हैं। बैनामाशुदा जमीन रिंगरोड परिक्षेत्र से दूर है। ऐसे में मुआवजा के लिए उनका अंश निर्धारण नहीं होना चाहिए।
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केस- तीन
सदर तहसील के कोपिया गांव के जौहर अली और हजरत अली ने बताया कि रिंग रोड के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई है। लेकिन, अब तक उनका अंश निर्धारण नहीं हो पा रहा है। लेखपाल से लगातार कहने के बाद भी उनकी नहीं सुनी जा रही है। इससे मुआवजे के लिए वह अपना प्रपत्र भी नहीं जमा कर पा रहे हैं।
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सऊदी से एक महीने में आना पड़ा दो बार
छितही नरसिंह ग्राम पंचायत के आदित्य सिंह ने बताया रिंग रोड में उनकी जमीन अधिग्रहित की गई है। उनके पिता विनोद कुमार सिंह सऊदी में कमाते हैं। एक महीने पहले वह आकर लेखपाल से मिलकर अंश निर्धारण के लिए प्रक्रिया पूरी कराई थी। इसके बाद वह सऊदी चले गए। बाद में बताया गया उनकी प्रक्रिया अधूरी है। बिना उनकी मौजूदगी के यह पूरी नहीं हो सकती है। नतीजा महीने भर भीतर फिर उन्हें सऊदी से आना पड़ा। 50 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हुआ।
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कोट
स्थानीय जिम्मेदारों की वजह से मामला उलझ रहा है। ग्राम पंचायत के तमाम काश्तकार लेखपाल के मनमानी की शिकायत कर रहे हैं। फिर भी जिम्मेदार कार्रवाई से परहेज कर रहे हैं।
-राधिका सिंह, ग्राम प्रधान, छितही नरसिंह
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अभी चुनावी व्यस्तता है। ईवीएम शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी है। दो-चार दिन बाद खाली होने पर अंश निर्धारण के मामले निपटाए जाएंगे। सभी आपत्तियों पर सुनवाई होगी। मुआवजा वितरण में तेजी लाई जाएगी।
संजीव ओझा, सीआरओ।
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लेखपाल के खिलाफ शिकायत मिली थी। उन्हें स्वयं ड्यूटी पर मौजूद रहने की हिदायत दी गई थी। कुछ लोगों की ओर से विदेश रह रहे व्यक्ति का अंश निर्धारण किए जाने का दबाव बनाने का मामला भी सामने आया था।
शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर