बस्ती। साधन सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से रबी फसलों की बोआई प्रभावित होने लगी है। राज्य कर्मचारी का दर्जा, नियमित वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर 22 अक्तूबर से चल रही हड़ताल के कारण 121 समितियों पर ताला लटक रहा है। खाद के लिए किसान भटक रहे हैं। आलू और सरसों की बोआई प्रभावित हो रही है। गेहूं की बोआई पिछड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। उधर, विभाग ने कार्रवाई तेज करते हुए 53 सचिवों के खिलाफ डीओ लेटर जारी किया है। वहीं, पांच के खिलाफ निलंबन के लिए नोटिस जारी किया गया है।
जिले में रबी सीजन की बोआई अब तक करीब 25 फीसदी ही हो सकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 40 फीसदी से अधिक था। जिले में लगभग पांच हजार हेक्टेयर में आलू और 30 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती होती है। करीब 50 हजार किसान आलू और एक लाख किसान सरसों की खेती करते हैं। इसके लिए डीएपी की जरूरत होती है लेकिन समितियां बंद होने से खाद वितरण में बाधा आ रही है। अक्तूबर में इन दोनों फसलों की बोआई हो जानी चाहिए। किसानों का कहना है कि समितियों पर खाद उपलब्ध होने के बावजूद ताला बंद होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। बाजार में भी उर्वरक अधिक दाम पर मिलने की शिकायत है। कृषि जानकारों के अनुसार, समय से बोआई नहीं होने पर फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
गेहूं की बोआई पर भी पड़ सकता है असर
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, 15 नवंबर से गेहूं की बोआई के लिए मौसम अनुकूल माना जाता है। इसके लिए किसान खेत तैयार करने में जुटे हैं। कृषि और सहकारिता विभाग की ओर से बीज व उर्वरक की व्यवस्था की जाती है, लेकिन सचिवों की हड़ताल के कारण समितियों पर उपलब्ध खाद का वितरण बाधित है। ऐसे में गेहूं की बोआई के समय खाद की उपलब्धता को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
विभाग का दावा, 92 केंद्रों पर शुरू हुआ वितरण
सहायक निबंधक सहकारिता रविशंकर के अनुसार, हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। बृहस्पतिवार को जिले के 92 केंद्रों पर डीएपी, एनपीके और यूरिया का वितरण कराया गया। विभाग का कहना है कि समितियों को खुलवाने के लिए सचिवों से बातचीत की जा रही है। जो सचिव समिति नहीं खोलेंगे, वहां विभाग वैकल्पिक व्यवस्था करेगा।
लिखित आदेश मिलने तक जारी रहेगी हड़ताल
उप्र संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि सचिवों को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन और इलाज की सुविधा दी जाए। मांगों पर लिखित आदेश जारी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। कोई सचिव समिति नहीं खोल रहा है और न ही उर्वरक का वितरण कर रहा है। उन्होंने धान खरीद का बहिष्कार करने की भी बात कही।
वितरण की व्यवस्था की स्थिति
जिले में बृहस्पतिवार को 92 केंद्रों पर डीएपी, एनपीके और यूरिया का वितरण कराया गया। विभाग के अनुसार, आठ एमटी एनपीके, 60 एमटी डीएपी और 36 एमटी यूरिया वितरित हुई। एआर कोऑपरेटिव ने बताया कि वर्तमान में बफर में डीएपी 828 एमटी और बिक्री केंद्रों पर 1000 एमटी डीएपी उपलब्ध है। एनपीके बफर में 1813 एमटी व बिक्री केंद्रों पर 210 एमटी उपलब्ध है। यूरिया 4183 एमटी बफर में जबकि 2000 एमटी यूरिया बिक्री केंद्रों पर है।
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15 नवंबर से गेहूं की बोआई शुरू हो जाती है। जिन खेतों में जलभराव नहीं हुआ है, उन्हें तैयार किया जा रहा है। सचिवों की हड़ताल के कारण समितियां नहीं खुल रही हैं, जिससे बोआई पिछड़ सकती है। -शिव कुमार, निवासी शेखपुरा
सचिवों की हड़ताल से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार में अधिक दाम पर उर्वरक मिल रहा है। किसान गेहूं की बोआई की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को इस समस्या का गंभीरता से समाधान कराना चाहिए। -नवी मोहम्मद, निवासी दौलतचक
अधिकांश समितियों पर उर्वरक उपलब्ध है। सचिवों से समितियां खुलवाने के लिए बातचीत की जा रही है। यदि सचिव समिति नहीं खोलते हैं तो विभाग वैकल्पिक व्यवस्था करेगा। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यह प्रदेशव्यापी हड़ताल है और उच्चाधिकारी इस पर विचार कर रहे हैं। सचिवों के खिलाफ डीओ लेटर जारी किए गए हैं। -रविशंकर, एआर कोऑपरेटिव, बस्ती।
12 समितियों पर सातवें दिन भी ताला
छावनी/बनकटी। साधन सहकारी समितियों के सचिवों के कार्य बहिष्कार से किसानों के सामने खाद का संकट खड़ा हो गया है। बनकटी क्षेत्र की 12 समितियों पर लगातार सातवें दिन भी ताला लटका रहा। वहीं, छावनी क्षेत्र में भी समितियां बंद होने से किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। रबी सीजन में सरसों, मटर और आलू की बोआई का समय चल रहा है। ऐसे में समितियों से खाद नहीं मिलने के कारण किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों पर उर्वरक खरीदना पड़ रहा है। किसानों को चिंता है कि हड़ताल लंबी खिंची तो गेहूं की बोआई भी प्रभावित हो सकती है।
बनकटी क्षेत्र की पकड़ी चंदा, सजनाखोर, महथा सजहरा, खोरिया बसौढ़ी, मनिकौरा, बोकनार, बाघापार चेनुआ और एकमा समेत 12 साधन सहकारी समितियों पर ताला लटका है। किसान खाद-बीज के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। किसान सियाराम शुक्ला, अजय शुक्ला, वशिष्ठ मिश्रा, लालजी शुक्ला, विवेकानंद शुक्ला, रामतौल चौधरी, जगदीश चौधरी और रामकिशुन चौधरी ने बताया कि सरसों, मटर और आलू की बोआई के लिए खाद की जरूरत है। गेहूं की बोआई भी जल्द शुरू होने वाली है। समय से खाद-बीज नहीं मिला तो बोआई पिछड़ सकती है।
छावनी क्षेत्र की गुंडाकुंवर और खम्हरिया साधन सहकारी समितियों पर भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। गुंडाकुंवर के किसान सूरज सिंह, राकेश शर्मा और विनोद ने बताया कि सरसों की बोआई के लिए डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन समिति बंद होने से परेशानी हो रही है। खम्हरिया के किसान रमेश सिंह, अमर बहादुर और झिनकन वर्मा ने बताया कि उन्हें निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदकर बोआई करनी पड़ रही है।