विद्यालय का स्टाफ डाॅक्टर को वाहन में ही इलाज करने का बना रहा था दबाव
ओपीडी में भीड़ की दलील देकर डाॅक्टर मरीज को अंदर लाने को कह रहे थे
संवाद न्यूज एजेंसी
रुधौली। सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पर बुधवार को लाई गई एक बेहोश छात्रा को गाड़ी पर जाकर डाॅक्टर के न देखने पर विद्यालय के शिक्षकों और लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया, तब जाकर लोग वहां से हटे। बाद में प्राथमिक इलाज के बाद छात्रा को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार बुधवार को दिलेश्वरी इंटर कॉलेज की कक्षा 10वीं की छात्रा आरती त्रैमासिक मरीक्षा के दौरान अचानक बेहोश हो गई। आनन-फानन विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण कुमार मिश्रा एवं अध्यापक महेंद्र त्रिपाठी निजी वाहन से उसे दोपहर लगभग 2.40 बजे सीएचसी रुधौली पर ले गए। कमरा नंबर छह में मरीज देख रहे डॉक्टर संजय चौधरी से वाहन में ही छात्रा को देखने की गुजारिश की। इस डॉ संजय ने मना करते हुए कहा कि वह सीएचसी पर अकेले हैं, मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर आइए। इससे शिक्षक महेंद्र त्रिपाठी के साथ जन्मेजय मिश्रा, राजकुमार सोनी सहित लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर रुधौली थाने के उप निरीक्षक रामानंद सिंह एवं राघवेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे तथा दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया। शिक्षक महेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि सीएचसी रुधौली पर बाहर से दवा और जांच आदि खुलेआम तथा बिना किसी डर के लिखी जाती है, इतना ही नहीं यहां मरीज की स्थिति थोड़ी सी भी जटिल होने पर उसे तुरंत रेफर कर दिया जाता है।
इस संबंध में डॉक्टर संजय चौधरी का कहना है कि जिस समय छात्र को लाया गया, उस समय ओपीडी चल रही थी। कमरा मरीजों से भरा हुआ था। मैंने सिर्फ इतना कहा कि छात्रा को स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल ले आइए, लेकिन कुछ लोग वाहन में ही इलाज करने का दबाव बनाने लगे।