पुलिस ने संदीप, हनुमान, अजय, आनंद, राम विलास, जग प्रताप को गिरफ्तार कर लिया। इनको कोर्ट में पेश कर आरोप तय कर दिए। सभी का ट्रायल शुरू हो गया, लेकिन नैनीश, शिवम और अमरमणि एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। तीनों की गिरफ्तारी भी नहीं हुई।
कुछ दिन बाद मुख्य आरोपी संदीप की मौत हो गई। इसके बाद न्यायालय में हाजिर हो चुके राम विलास, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, जग प्रसाद व हनुमान शुक्ला ने केस में अपनी फाइल अलग करवा ली। इस तरह से दो फाइल तैयार हुई। एक फाइल में राम विलास, अजय मिश्रा, आनंद सिंह और जग प्रसाद तथा हनुमान शुक्ला हैं। दूसरी फाइल में फरार चल रहे अमरमणि, नैनीश और शिवम का नाम है। इस वजह से पांच आरोपियों की फाइल में ट्रायल चल रहा है।
मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए न्यायालय में पांचों आरोपियों पर चार्ज फिक्स करने की कार्रवाई चल रही थी। इस पर छह सितंबर को आरोपियों की तरफ से डिस्चार्ज करने का प्रार्थनापत्र दिया था, जिसे न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पुलिस की चार्जशीट में उन पर मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य और आधार हैं। सुनवाई के लिए तीन नवंबर की तारीख तय की गई थी।
अपहरण कांड में ट्रायल में लगी फाइल में शामिल पांचों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा है कि पुलिस ने जो चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की है उसमें उन पर अपहरण का आरोप साबित नहीं होता है। उनके कब्जे से न तो अपहृत की बरामदगी हुई थी न ही उनके किसी संसाधन का अपहरण में इस्तेमाल हुआ है। उनकी दलील को नकारते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने डिस्चार्ज आवेदन खारिज करते हुए चार्ज फिक्स करने के लिए तीन नवंबर की तारीख तय की थी। इससे पहले 12 अक्तूबर को आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में डिस्चार्ज आवेदन खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए रिट दाखिल कर दिया।