बस्ती। वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन की वजह से निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ला की जमानत अर्जी पर सुनवाई बृहस्पतिवार को फिर टल गई। न्यायालय में कंडोलेंस होने की वजह से अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया। ऐसे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सक्सेना ने सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है।
16 नवंबर को तहसील में तैनात एक महिला राजस्व अधिकारी ने तहरीर देकर तत्कालीन नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ल पर 11-12 नवंबर की रात सरकारी आवास में जबरदस्ती घुसकर दुष्कर्म की कोशिश, गला दबाकर हत्या का प्रयास, मारपीट, अपशब्द कहने का आरोप लगाया था। उसी दिन डीएम स्तर से विशाखा कमेटी की सिफारिशों के क्रम में तीन महिला अधिकारियों की जांच कमेटी गठित किया था। 17 नवंबर को पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के हिसाब से केस दर्ज किया। 21 नवंबर को राजस्व परिषद ने आरोपी घनश्याम शुक्ल को निलंबित कर कानपुर कमिश्नर कार्यालय से संबद्ध कर दिया था।
एक बार खारिज, तीन बार टल चुकी है सुनवाई
घनश्याम की जमानत अर्जी सीजेएम न्यायालय से एक बार खारिज हो चुकी है। जबकि तीन बार जिला एवं सत्र न्यायालय में अर्जी पर सुनवाई टल चुकी है। सबसे पहले 28 नवंबर को सीजेएम न्यायालय में जमानत की अर्जी दी गई थी, जिसे न्यायालय ने उसी दिन खारिज कर दिया था। पांच दिसंबर को जिला एवं सत्र न्यायालय में अर्जी दी गई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि आरोपी घनश्याम पर गंभीर अपराध करने का आरोप हैं। उसकी केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट आदि समस्त प्रपत्र तलब किया जाए, ताकि विवेचक की तफ्तीश और केस से जुड़े अन्य पहलुओं को गौर करते हुए जमानत पर निर्णय लिया जाए। इसमें सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई। उस दिन विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट तलब करने के प्रार्थनापत्र के बाद 12 दिसंबर को सुनवाई होनी थी। उस दिन कंडोलेंस की वजह से सुनवाई 14 दिसंबर तक टाल दी गई। 14 दिसंबर को फिर कंडोलेंस होने के कारण तीसरी बार सुनवाई टली।